जेट फ्यूल की कीमतों में उछाल: सरकार से एटीएफ मूल्य निर्धारण पर व्यापक समीक्षा का आग्रह
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जेट फ्यूल (एविएशन टर्बाइन फ्यूल – एटीएफ) की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल ने भारतीय एयरलाइन उद्योग को गंभीर वित्तीय संकट की कगार पर पहुँचा दिया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (एफआईए) ने सरकार को एटीएफ के मौजूदा मूल्य निर्धारण फॉर्मूले की पुनः समीक्षा करने का आग्रह किया है, ताकि एयरलाइन कंपनियों को अस्थायी या स्थायी रूप से मार्ग बंद करने से बचाया जा सके।
एटीएफ की कीमतों में तीव्र वृद्धि
पश्चिम एशिया में जारी भू‑राजनीतिक तनाव ने ब्रेंट क्रूड की कीमत को $72 से $118 प्रति बैरल तक धकेल दिया। इस उछाल के कारण एटीएफ की कीमत $87.24 से बढ़कर $260.24 प्रति बैरल (295% वृद्धि) तक पहुँच गई। वर्तमान में एटीएफ की कीमत $175.33 प्रति बैरल है, जो मार्च 2025 के स्तर से काफी अधिक है। पिछले तीन महीनों में एटीएफ की कीमत में 25% की औसत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि अक्टूबर में ही 13% से अधिक की कीमत वृद्धि हुई।
एयरलाइन कंपनियों पर वित्तीय दबाव
एफआईए के अनुसार, एटीएफ की लागत में इस उछाल ने एयरलाइन की कुल परिचालन लागत को 30‑40% से बढ़ाकर 55‑60% तक पहुंचा दिया है। एयर इंडिया, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसे प्रमुख सदस्य इस बढ़ती लागत के कारण नकदी प्रवाह में गंभीर दबाव महसूस कर रहे हैं। यदि इस स्थिति में समय पर राहत नहीं मिली, तो कई एयरलाइन गैर‑व्यावहारिक मार्गों को बंद करने या सेवाएं घटाने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
एफआईए की सरकार से मांगें
एफआईए ने नागर विमानन मंत्रालय को लिखे पत्र में प्रमुख दो बिंदु रखे हैं:
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- एटीएफ के मूल्य निर्धारण के मौजूदा फॉर्मूले की पुनः समीक्षा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ($10‑12 प्रति बैरल) के बजाय वास्तविक लागत + उचित मार्जिन पर आधारित मॉडल अपनाया जाए।
- वर्तमान में एटीएफ के मार्जिन में $60 प्रति बैरल का असामान्य अंतर है, जिसे घटाकर अधिक यथार्थवादी स्तर पर लाया जाए।
वास्तविक लागत‑आधारित मॉडल के संभावित लाभ
यदि एटीएफ की कीमतें वास्तविक उत्पादन लागत और उचित लाभ मार्जिन के आधार पर तय की जाएँ, तो:
- एयरलाइन की परिचालन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी, जिससे टिकट कीमतों में अत्यधिक वृद्धि को रोका जा सकेगा।
- विमानन नेटवर्क की स्थिरता बनी रहेगी, क्योंकि एयरलाइन को कम लागत पर मार्ग संचालित करने की सुविधा होगी।
- रुपए के मूल्य में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार की अस्थिरता के प्रभाव को सीमित किया जा सकेगा।
मुख्य बातें
- एटीएफ की कीमत मार्च 2025 के बाद से $175.33 प्रति बैरल पर स्थिर है, जबकि 295% की अधिकतम वृद्धि देखी गई।
- पिछले तीन महीनों में एटीएफ की कीमत में 25% की औसत वृद्धि हुई।
- एफआईए ने एटीएफ के मूल्य निर्धारण फॉर्मूले की पुनः समीक्षा की मांग की है।
- एयरलाइन की कुल परिचालन लागत 55‑60% तक बढ़ गई है, जिसमें एटीएफ सबसे बड़ा खर्च है।
- यदि राहत नहीं मिली, तो कई एयरलाइन गैर‑व्यावहारिक मार्ग बंद करने पर विचार कर सकती हैं।
आगे का रास्ता
सरकार को अब एटीएफ की कीमतों को स्थिर करने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर विचार करना होगा। संभावित कदमों में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के साथ मिलकर लागत‑आधारित मूल्य निर्धारण मॉडल अपनाना, तेल आयात पर कर या शुल्क में छूट देना, और एयरलाइन को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए विशेष फंड स्थापित करना शामिल हो सकता है। इन उपायों से न केवल एयरलाइन उद्योग को राहत मिलेगी, बल्कि यात्रियों के लिए भी टिकट कीमतों में अत्यधिक वृद्धि को रोका जा सकेगा।




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