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भारत

जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नाराज विधायकों का इस्तीफा संकट: उमर अब्दुल्ला सरकार की बहुमत की जाँच

3 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 06 Nov 2026• अपडेट 06 Nov 2026
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जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नाराज विधायकों का इस्तीफा संकट: उमर अब्दुल्ला सरकार की बहुमत की जाँच
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के 20‑25 विधायकों के इस्तीफे की संभावना से उमर अब्दुल्ला सरकार की बहुमत की गणना बदल सकती है। कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़े असंतोष, बैठकें और एंटी‑डिफेक्शन कानून…

जम्मू‑कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ते असंतोष ने राजनीतिक माहौल को अस्थिर कर दिया है। 18‑25 नाराज विधायकों के इस्तीफे की संभावना उमर अब्दुल्ला सरकार की बहुमत को खतरे में डाल सकती है, जिससे विधानसभा में नंबर‑गेम फिर से शुरू हो गया है।

कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ा असंतोष

27 अक्टूबर को चार नए मंत्रियों को शामिल कर मंत्रिपरिषद की संख्या नौ कर दी गई, जो निर्धारित अधिकतम सीमा थी। लेकिन कई वरिष्ठ विधायक, जिनमें छह‑बार के विधायक मुबारक गुल भी शामिल हैं, को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से नाराज़गी व्यक्त की। उनका दावा है कि केवल मंत्री पद ही नहीं, बल्कि दो साल का कार्यकाल पूरा कर चुके मंत्रियों को हटाने और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की भी मांग है।

नाराज विधायकों की बैठकें

नाराज विधायकों ने अब तक चार दौर की बैठकें की हैं। सबसे पहले कैसर लोन के हुमहामा स्थित आवास पर, फिर नजीर गुरेजी के आवास पर, उसके बाद फारूक शाह और पूर्व सांसद व विधायक हसनैन मसूदी के आवास पर चर्चा हुई। आज सुबह 10 बजे श्रीनगर के गुपकार स्थित फारूक अब्दुल्ला के आवास पर 18 विधायकों की मुलाकात प्रस्तावित है, जिसमें फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दोनों शामिल होंगे।

उमर अब्दुल्ला सरकार की वर्तमान बहुमत स्थिति

जम्मू‑कश्मीर विधानसभा में कुल 90 निर्वाचित सीटें हैं। बहुमत के लिए 46 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। वर्तमान में:

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  • NC के पास 41 विधायक
  • कांग्रेस के 6 विधायक
  • निर्दलीय 6 और सीपीआईएम 1 का समर्थन

इस प्रकार उमर अब्दुल्ला सरकार के पास कुल 54 विधायक हैं, जो बहुमत से 8 अधिक है।

इस्तीफा की स्थिति में गणित कैसे बदलता है?

यदि 20 नाराज विधायकों के इस्तीफे स्पीकर द्वारा स्वीकार कर लिए जाएँ, तो सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 70 रह जाएगी (90‑20)। बहुमत का आंकड़ा 36 (70/2+1) हो जाएगा। इस स्थिति में:

  • NC के पास 21 विधायक बचेंगे (41‑20)
  • कांग्रेस 6, निर्दलीय 6, सीपीआईएम 1 – कुल 34

सरकार के पास 34 विधायक रहेंगे, जबकि बहुमत 36 की आवश्यकता होगी। दो विधायकों की कमी से सरकार अल्पमत में आ सकती है। यदि इन 34 में से कोई निर्दलीय समर्थन वापस ले ले, तो संख्या 33 हो जाएगी, जिससे बहुमत से तीन कम हो जाएगा।

दलबदल कानून की बाधाएँ

जम्मू‑कश्मीर में संविधान की दसवीं अनुसूची (एंटी‑डिफेक्शन) लागू है। जम्मू‑कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 28 के तहत, यदि कोई विधायक स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है या व्हिप के खिलाफ वोट करता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो सकती है। पार्टी में विलय के लिए दो‑तिहाई (28) सदस्य की सहमति आवश्यक है, इसलिए 20 विधायकों का समूह इस शर्त को पूरा नहीं करता।

मुख्य बातें

  • कैबिनेट विस्तार (27 अक्टूबर) के बाद NC के 20‑25 विधायकों में असंतोष बढ़ा।
  • फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के बीच आज 18 विधायकों की बैठक निर्धारित।
  • उमर अब्दुल्ला सरकार के पास वर्तमान में 54 विधायक हैं (बहुमत से 8 अधिक)।
  • 20 विधायकों के इस्तीफे से प्रभावी सदस्य संख्या 70, बहुमत 36, सरकार के पास 34 विधायक – अल्पमत की संभावना।
  • एंटी‑डिफेक्शन कानून के तहत दलबदल के लिए दो‑तिहाई (28) सदस्य की सहमति आवश्यक, इसलिए 20 का समूह अकेले नहीं बदल सकता।

आगे क्या हो सकता है?

फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला की बैठक का परिणाम अभी स्पष्ट नहीं है। यदि बातचीत से नाराज विधायकों को मनाया जा सके तो सरकार का बहुमत सुरक्षित रह सकता है। अन्यथा, इस्तीफे या दलबदल की प्रक्रिया जारी रह सकती है, जिससे विधानसभा में नई गठबंधन की संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। इस राजनीतिक उलझन का विकास जम्मू‑कश्मीर की स्थिरता और केंद्र‑राज्य संबंधों पर भी असर डाल सकता है।

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