जम्मू‑कश्मीर में लश्कर‑ए‑तैयबा के कमांडर हाशिम मूसा ने घाव भरने के लिए शहद का सहारा लिया
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जम्मू‑कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए लश्कर‑ए‑तैयबा के शीर्ष आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा ने अपने गोली के घावों को भरने के लिये शहद का उपयोग किया, यह उसके बरामद फोन में मिली तस्वीरों से स्पष्ट हुआ। इस अनोखे उपचार के पीछे आयुर्वेदिक परंपरा और पाकिस्तान में स्थित उसके आकाओं के निर्देश दोनों ही थे।
मूसा की मुठभेड़ और मौत
जम्मू‑कश्मीर के राजौरी इलाके में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान सुरक्षा बलों ने 45 दिनों से अधिक समय तक चल रहे दो आतंकवादियों की तलाश पूरी की। डोरीमल‑गंभीर मुगला क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में हाशिम मूसा को गोली लगी और वह घायल हो गया। बाद में सुरक्षा बलों ने उसे घेर कर मार गिराया। मूसा लश्कर‑ए‑तैयबा (एलईटी) का क्षेत्रीय मुख्य ऑपरेशनल कमांडर और कई बड़े हमलों में शामिल रहा था।
पाकिस्तान के विशेष बल का पूर्व कमांडो
अधिकारियों ने बताया कि मूसा पहले पाकिस्तान की सेना के विशेष बल स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) का कमांडो था। वह 2025 के पहलगाम हमले का प्रमुख साजिशकर्ता भी माना जाता है, जिसमें बैसरन घाटी में पर्यटकों सहित 26 लोगों की मौत हुई थी।
शहद से घाव भरने की प्रक्रिया
मूसा ने जंगल में छिपते हुए अपने घावों को जल्दी भरने के लिये शहद का प्रयोग किया। सुरक्षा बलों की घेराबंदी के कारण उसे औपचारिक चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई, इसलिए उसने आयुर्वेदिक पद्धति अपनाई। उसके बरामद फोन में शहद से उपचार किए गए घावों की तस्वीरें मिलीं, जिन्हें वह पाकिस्तान में स्थित अपने आकाओं को भेज रहा था। आकाओं ने शहद की शुद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, क्योंकि शुद्ध शहद में एंटी‑बैक्टीरियल गुण होते हैं।
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आयुर्वेद में शहद का महत्व
आल इंडिया डाक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (AIASOM) के अध्यक्ष डॉ. आर. पी. पाराशर ने बताया कि शहद का उपयोग प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ सुश्रुत संहिता में व्रण चिकित्सा के लिये किया गया है। शहद की उच्च आस्मोटिक गतिविधि, अम्लीय pH और हाइड्रोजन पेरोक्साइड उत्पन्न करने की क्षमता रोगाणुओं को रोकती है और घाव के लिये अनुकूल वातावरण बनाती है। हालांकि, डॉ. पाराशर ने यह भी चेतावनी दी कि गोली के कणों को पूरी तरह साफ करना आवश्यक है, अन्यथा वे घाव भरने की प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं।
मूसा के प्रमुख आतंकवादी कृत्य
मूसा पाँच साल से सक्रिय था और कई बड़े हमलों में सीधे तौर पर शामिल रहा। प्रमुख घटनाएँ इस प्रकार हैं:
- अप्रैल 2023 – पुंछ के भाटा धुरियां में हमले की साजिश, जिसमें पाँच सुरक्षा जवान मारे गए।
- मई 2023 – राजौरी के कांडी जंगल में विस्फोट, जिसमें पाँच कमांडो मारे गए।
- दिसंबर 2023 – पुंछ के डेरा की गली में हमला, जिसमें चार सैन्यकर्मी मारे गए।
- मई 2024 – शासितार के पास भारतीय वायु सेना के काफिले पर हमला, जिसमें एक वायुसैनिक की मौत हुई।
- अक्टूबर 2024 – गांदरबल में गगनगीर सुरंग परियोजना के निर्माण शिविर पर हमला, सात लोगों की मौत।
- अक्टूबर 2024 (चार दिन बाद) – बुटापथरी में सेना के वाहन पर घात, दो जवान और दो नागरिक पोर्टर मारे गए।
मुख्य बातें
- हाशिम मूसा, लश्कर‑ए‑तैयबा का प्रमुख कमांडर, जम्मू‑कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
- जंगल में छिपते हुए वह अपने गोली के घावों को भरने के लिये शहद का उपयोग कर रहा था।
- शहद से उपचार की तस्वीरें उसके बरामद फोन में मिलीं और पाकिस्तान में स्थित उसके आकाओं को भेजी गईं।
- आयुर्वेदिक परम्परा में शहद को व्रण चिकित्सा के लिये प्रयोग किया जाता है; आधुनिक शोध भी इसके एंटी‑बैक्टीरियल गुणों की पुष्टि करता है।
- मूसा ने 2025 के पहलगाम हमले सहित कई बड़े आतंकवादी कृत्यों में भाग लिया था।
पुलिस और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
मूसा की मौत से जम्मू‑कश्मीर में पाँच साल से जारी उसकी तलाश समाप्त हुई। सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि उसकी गिरफ़्तारी से क्षेत्र में आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों में चिकित्सा सहायता के बिना घावों को भरने के लिये शहद जैसी पारम्परिक विधियों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
हाशिम मूसा की कहानी यह दर्शाती है कि आतंकवादी भी कठिन परिस्थितियों में पारम्परिक उपचार पद्धतियों की ओर रुख कर सकते हैं। जबकि शहद के एंटी‑बैक्टीरियल गुण वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हैं, गोली के घावों के लिये उचित चिकित्सकीय देखभाल आवश्यक है। सुरक्षा बलों की इस मुठभेड़ से क्षेत्र में एक प्रमुख आतंकवादी कमांडर का अंत हुआ, परन्तु आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता और निरंतर निगरानी की आवश्यकता अभी भी बरकरार है।




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