जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव: 2006 के भंग का कारण और आखिरी पदाधिकारी
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में छात्रसंघ चुनाव का रास्ता 20 साल बाद फिर से खुल रहा है। 31 मार्च 2006 को भंग किए गए छात्रसंघ को अब पुनः स्थापित करने की घोषणा की गई है, परन्तु 2006 के भंग के पीछे की वजह और उस समय के पदाधिकारियों के बारे में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। इस लेख में हम JMI के छात्रसंघ के इतिहास, 2006 के भंग का कारण और 2005‑06 के आखिरी अध्यक्ष‑उपाध्यक्ष‑महासचिव‑संयुक्त सचिव के नामों को विस्तार से देखेंगे।
जामिया में छात्रसंघ चुनाव का प्रारम्भिक इतिहास
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई और 1925 में करोलबाग में स्थानांतरित हुई। 1935‑36 में ओखला परिसर में वर्तमान कैंपस स्थापित किया गया। 1988 में विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला। इस क्रम में पहला छात्रसंघ चुनाव 1981 में हुआ, जिसमें जुबैर खान को अध्यक्ष चुना गया। उनके साथ रिजवान अली खानी (उपाध्यक्ष), आफताब अहमद (महासचिव) और जलालुद्दीन (संयुक्त सचिव) ने पद संभाले।
1996 तक का चुनाव‑परिचालन
पहले चुनाव के बाद 12 साल तक (1981‑1993) ही छात्रसंघ चुनाव आयोजित हुए। 1990 में चुनाव नहीं हुआ, और 1996 में विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ चुनाव पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध का मुख्य कारण छात्रसंघ के पदाधिकारियों द्वारा स्टूडेंट एडमिशन, हॉस्टल सीटों के आवंटन और परीक्षा‑जांच में दखल देना था, जिससे प्रशासनिक कार्यों में बाधा उत्पन्न हुई।
2005‑06 का चुनाव और उसका शीघ्र भंग
1996 के प्रतिबंध के बाद 9 साल की खामोशी के बाद, जुलाई 2005 में JMI ने फिर से छात्रसंघ चुनाव आयोजित किया। इस बार नया छात्रसंघ चुना गया, परन्तु 31 मार्च 2006 को इसे भंग कर दिया गया और चुनाव पर फिर से रोक लगा दी गई।
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भंग का कारण
2006 में कैंपस में हिंसक घटनाएँ हुईं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि छात्रसंघ द्वारा उत्पन्न हुई हिंसा और पढ़ाई में व्यवधान के कारण इसे भंग करना आवश्यक था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भंग से पहले विश्वविद्यालय दो दिन तक बंद रहा। मई 2012 में राज्यसभा में एक उत्तर में विश्वविद्यालय ने कहा कि अंतिम घटना कुलपति पर हुए हमले की थी, जिससे छात्रसंघ को भंग करने का निर्णय लिया गया।
भंग के बाद की स्थिति
भंग के बाद छात्रसंघ को बहाल नहीं किया गया। कई बार छात्रों ने चुनाव आयोजित कराने की मांग की, मामला कोर्ट तक पहुँचा, परन्तु कोई निर्णायक आदेश नहीं आया। 2017 में विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ के स्थान पर विषय‑संघ (डिपार्टमेंटल यूनियन) का प्रस्ताव रखा, और तब से विषय प्रतिनिधियों का चुनाव चलता आ रहा है।
2005‑06 के आखिरी पदाधिकारी
2005 में हुए आखिरी छात्रसंघ चुनाव में निम्नलिखित पदाधिकारी चुने गए:
- अध्यक्ष: शम्स परवेज (वर्तमान में बिहार की पूर्णिया यूनिवर्सिटी के अंतर्गत अररिया कॉलेज में भूगोल के असिस्टेंट प्रोफेसर)
- उपाध्यक्ष: मुहम्मद फहीम हैदर खान
- महासचिव: फरहत अली
- संयुक्त सचिव: जिल्ले सुभानी
इन पदाधिकारियों के वर्तमान पेशेवर स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, सिवाय अध्यक्ष शम्स परवेज के, जो अब प्रोफेसर हैं।
मुख्य बातें
- JMI में पहला छात्रसंघ चुनाव 1981 में हुआ, जुबैर खान अध्यक्ष बने।
- 1996 में छात्रसंघ के प्रशासनिक दखल के कारण चुनाव पर प्रतिबंध लगा।
- 2005 में 9 साल बाद फिर से चुनाव हुआ, पर 31 मार्च 2006 को हिंसक घटनाओं के कारण भंग किया गया।
- भंग से पहले विश्वविद्यालय दो दिन तक बंद रहा और कुलपति पर हमला हुआ।
- 2005‑06 के आखिरी अध्यक्ष शम्स परवेज अब भूगोल के असिस्टेंट प्रोफेसर हैं; उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव के वर्तमान कार्यस्थल अज्ञात।
- 2024‑25 में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा हुई, परन्तु कुछ छात्र समूह समयसीमा निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं।
भविष्य की दिशा
जामिया प्रशासन ने छात्रसंघ संविधान बनने के 15 दिन के भीतर चुनाव आयोजित करने का वादा किया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों का एक गुट अभी भी चुनाव की समयसीमा पर दबाव बना रहा है। यदि चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित हो जाता है, तो यह 20 साल बाद विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व को पुनर्स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।




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