विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद को शांति के लिए घातक खतरा कहा, कुछ देशों की नीति की निंदा
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संयुक्त राष्ट्र (UN) स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित “चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल कॉन्फ्रेंस” में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आतंकवाद को शांति के लिए एक घातक खतरा कहा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी देश की नीतियों को आगे बढ़ाने के साधन के रूप में आतंकवाद का प्रयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है और इसे कभी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद की निंदा
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह संगठन केवल मूक दर्शक नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक संकटों से निपटने में सक्रिय और मजबूत नेतृत्व दिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में आतंकवाद से जुड़े कई सबक मिलने के बावजूद कुछ देश अभी भी राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देते हैं, बिना किसी का नाम लिए।
संवाद और कूटनीति को एकमात्र समाधान के रूप में
विदेश मंत्री ने शांति की अविभाज्यता पर बल देते हुए कहा, “कहीं भी युद्ध होना, हर जगह शांति के लिए खतरा है।” उन्होंने यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों का उल्लेख किया और कहा कि भारत का यह मानना कि संवाद और कूटनीति ही एकमात्र समाधान हैं, वैश्विक भावना को दर्शाता है।
विकासशील देशों को ‘4F’ संकट
जयशंकर ने विकासशील देशों के सामने मौजूद ‘4F’ संकट – वित्त (Finance), ईंधन (Fuel), खाद्य (Food) और उर्वरक (Fertilizer) – का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को सुलझाने में विकसित देशों की भी बराबर की जिम्मेदारी है। बाजार में गलत और संकुचित तरीकों से आम जनता की कठिनाइयाँ बढ़ रही हैं, इसलिए इस पर गंभीर और ईमानदार बातचीत की तत्काल आवश्यकता है।
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मुख्य बातें
- आतंकवाद को शांति के लिए घातक खतरा बताया गया।
- किसी भी देश की नीति में आतंकवाद का प्रयोग अस्वीकार्य है।
- संयुक्त राष्ट्र को सक्रिय नेतृत्व दिखाना चाहिए, केवल मूक दर्शक नहीं।
- संवाद और कूटनीति को एकमात्र समाधान माना गया।
- विकासशील देशों को ‘4F’ संकट का सामना करना पड़ रहा है।
- विकसित देशों की भी इन समस्याओं के समाधान में बराबर की जिम्मेदारी है।



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