जयशंकर‑अब्दुल्ला बिन जायद की अबू धाबी बैठक: बदलते वैश्विक क्रम में नई रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल‑नाहयान के साथ अबू धाबी में एक सौहार्दपूर्ण बैठक की। दोनों नेताओं ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के ढांचे में द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार‑विमर्श किया, जिससे बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में सहयोग के नए मोड़ स्पष्ट हुए।
बैठक के मुख्य बिंदु
- वैश्विक क्रम में तेज़ बदलावों को समझने और उनका जवाब देने की आवश्यकता पर ज़ोर।
- परम्परागत सहयोग मॉडल से आगे बढ़कर बहुपक्षीयता (multilateralism) और सीमित देशों के बीच सहयोग (minilateralism) को सुदृढ़ करने की दिशा में रणनीतिक समझ विकसित करना।
- पिछले दशक में भारत‑UAE साझेदारी को एक सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करना, जहाँ दोनों देशों ने बदलते वैश्विक माहौल के अनुरूप कदम उठाए हैं।
- बहुपक्षीय संस्थाओं में त्वरित सुधार और छोटे समूहों (minilateral) की भूमिका को अहम मानना।
ग्लोबल ऑर्डर में बदलाव की पहचान
जयशंकर ने बताया कि वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था दो प्रकार के बदलावों से प्रभावित है – दीर्घकालिक प्रवृत्तियाँ और अचानक उत्पन्न हुए झटके। इन दोनों को समझकर ही देश अपनी नीति‑निर्धारण में उचित प्रतिक्रिया दे सकते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कहा, “नई साझेदारियों और विकल्पों की तलाश करना आवश्यक हो जाता है।”
बहुपक्षीयता से मिनी‑लेटरलिज्म की ओर
परम्परागत बहुपक्षीय ढाँचे में सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए, जयशंकर ने कहा कि इसे “मिनि‑लेटरलिज्म” के माध्यम से तेज़ किया जा सकता है। इस प्रकार के छोटे‑छोटे समूहों में सहयोग से तेज़ निर्णय‑लेना और अधिक लचीला उत्तर देना संभव हो सकता है।
भारत‑UAE साझेदारी का दशकीय उदाहरण
पिछले दस वर्षों में भारत और यूएई के बीच विकसित हुई रणनीतिक साझेदारी को दोनों देशों ने एक मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया। इस साझेदारी ने ऊर्जा, व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में गहरा प्रभाव डाला है, जिससे दोनों देशों को बदलते वैश्विक माहौल में स्थिरता मिली। जयशंकर ने इस उदाहरण को दोहराते हुए कहा, “हमारी साझेदारी ने दिखाया है कि कैसे हम बदलते ग्लोबल माहौल का सामना कर सकते हैं।”
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आगे की दिशा
बैठक में यह स्पष्ट हुआ कि भारत और यूएई दोनों ही बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, मिनी‑लेटरल सहयोग और नई रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का सामना करना चाहते हैं। दोनों देशों ने इस दिशा में निरंतर संवाद और सहयोग को जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
मुख्य बातें
- दुनिया तेज़ी से बदल रही है; अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।
- बहुपक्षीयता (multilateralism) को सुदृढ़ करने के साथ‑साथ मिनी‑लेटरलिज्म (minilateralism) को बढ़ावा देना चाहिए।
- भारत‑UAE की दशकीय साझेदारी इस बदलाव के अनुकूलन का सफल उदाहरण है।
- भविष्य में छोटे‑छोटे समूहों के माध्यम से तेज़ और प्रभावी सहयोग पर ध्यान दिया जाएगा।




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