ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की पाबंदियों से छूट दी
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ईरान ने भारतीय, चीनी, इराकी और कतरी कमर्शियल जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) से गुजरने की पाबंदियों से मुक्त कर दिया है। यह घोषणा ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मोगादम ने ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी (ISNA) को दी।
छूट के पीछे के कारण
अमीर हयात ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य दो प्रमुख हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। भारत के जहाजों को छूट देने का मुख्य कारण भारतीय नाविकों की जान बचाना और भारत से दवाओं का आयात सुनिश्चित करना है। वहीं, चीन को छूट देने का उद्देश्य बीजिंग का राजनीतिक समर्थन हासिल करना है। इराक और कतर को भी समान रणनीतिक कारणों से इस छूट में शामिल किया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा जलडमरूमध्य है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। विश्व की लगभग 20 % ऊर्जा आपूर्ति इस रास्ते से गुजरती है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा का एक अहम कड़ी बनता है। 28 फ़रवरी को अमेरिका‑इज़राइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद, ईरान ने इस मार्ग को बंद करने की कोशिश की थी, जिससे क्षेत्रीय नौसैनिक तनाव बढ़ गया।
पिछले प्रतिबंध और उनके प्रभाव
फ़रवरी 2024 के बाद ईरान ने होर्मुज में सख्त पाबंदियां लगाई थीं। केवल कुछ ही जहाजों को बिना जांच के गुजरने दिया जाता था, जबकि बाकी को ट्रांजिट फीस और विस्तृत जांच का सामना करना पड़ता था। इस अवधि में कम से कम 15 भारतीय नाविक मारे गए, जिसमें सोमवार को ओमान के लिमाह के पास ‘MSV अल जुसुफी’ पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत शामिल है।
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भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने लगातार कूटनीति के माध्यम से इस संघर्ष का समाधान निकालने की अपील की है। भारत ने इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों को “बेहद चिंताजनक” कहा और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्गों की सुरक्षा की मांग की है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बंद होना चाहिए और व्यापार को बिना रुकावट के बहाल किया जाना चाहिए।
मुख्य बातें
- ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के कमर्शियल जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की पाबंदियों से मुक्त किया।
- छूट का उद्देश्य भारतीय नाविकों की सुरक्षा, भारत‑ईरान दवा आयात और चीन‑ईरान राजनीतिक सहयोग है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 % मार्ग है।
- फ़रवरी 2024 के बाद इस मार्ग पर कई हमले हुए, जिनमें 15 भारतीय नाविक मारे गए।
- भारत ने इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों को “चिंताजनक” कहा और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुरक्षित आवाजाही की मांग की।
आगे की संभावनाएँ
छूट के बाद भारतीय और चीनी जहाजों की आवाजाही में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा और वस्तु आयात में सुगमता आएगी। हालांकि, अमेरिकी और इज़राइली नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी जारी रहने की संभावना है, जिससे भविष्य में फिर से प्रतिबंध या नई कूटनीतिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं। क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सभी पक्षों को संवाद जारी रखने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का सम्मान करने की आवश्यकता है।




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