पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप INS सूर्य का लॉन्च, नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता में बड़ा बूस्ट
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में भारत का पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS‑1) – INS सूर्य – को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया। इस कदम से भारतीय नौसेना की समुद्री शक्ति और लंबी दूरी तक ऑपरेशनल क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
INS सूर्य – फ्लीट सपोर्ट शिप का महत्व
फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) का मुख्य कार्य नौसेना के युद्धपोतों को समुद्र में ही ईंधन, जल, खाद्य सामग्री, पुर्जे और रखरखाव सेवाएँ प्रदान करना है। इससे युद्धपोतों को पोर्ट पर लौटने की आवश्यकता कम होती है और वे अधिक समय तक सतत ऑपरेशन कर सकते हैं। INS सूर्य में बड़ी कार्गो और फ्लूड कैपेसिटी, फर्स्ट‑लाइन मेंटेनेंस वर्कशॉप, मल्टी‑रोल हेलीकॉप्टर डेक और सेल्फ‑डिफेंस सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।
लॉजिस्टिक सपोर्ट की नई क्षमताएँ
- समुद्र में ईंधन रिफिलिंग और जल आपूर्ति
- रखरखाव व मरम्मत कार्यों के लिए मोबाइल वर्कशॉप
- हेलीकॉप्टर संचालन के लिए डेडिकेटेड डेक
- आधुनिक सेल्फ‑डिफेंस हथियार प्रणाली
इन सुविधाओं के कारण भारतीय नौसेना हिंद महासागर में लगातार ऑपरेशन करने की अपनी क्षमता को कई गुना बढ़ा सकेगी।
हिंदुस्तान शिपयार्ड की नई क्षमताएँ
लॉन्च के साथ ही HSL ने अपग्रेडेड Slipway‑4 की कील रखी, जिससे अब 45,000 डेडवेट (DWT) तक के बड़े जहाजों का निर्माण संभव हो गया है। Slipway‑3 और Slipway‑4 के बीच स्थापित 300‑टन का गोलियथ क्रेन भारी शिप ब्लॉक्स को तेज़ और सटीकता से संभालता है। यह क्रेन ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत विकसित किया गया है और इसमें ऑटोमेशन व रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं।
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विशाखापत्तनम – नया मैरीटाइम इंडस्ट्रियल हब
रक्षा मंत्री ने बताया कि विशाखापत्तनम में ईस्टर्न नेवल कमांड, नेवल डॉकयार्ड, हिंदुस्तान शिपयार्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट पहले से मौजूद हैं। इन सबके समन्वय से भारत का एक मजबूत मैरीटाइम इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जो शिपबिल्डिंग, रखरखाव और लॉजिस्टिक सपोर्ट को एक ही स्थान पर एकीकृत करेगा।
मुख्य बातें
- INS सूर्य (FSS‑1) भारत का पहला स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप है।
- लॉन्च का आयोजन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
- हिंदुस्तान शिपयार्ड में अपग्रेडेड Slipway‑4 और 300‑टन गोलियथ क्रेन का उद्घाटन हुआ।
- FSS‑1 में बड़ी कार्गो/फ्लूड कैपेसिटी, हेलीकॉप्टर डेक और सेल्फ‑डिफेंस सिस्टम होंगे।
- विशाखापत्तनम को भविष्य में भारत का प्रमुख मैरीटाइम इंडस्ट्रियल हब बनाया जाएगा।
भविष्य की दिशा
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब केवल आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिपबिल्डिंग क्षमता विकसित करेगा। उन्होंने हिंदुस्तान शिपयार्ड को नेवी, DRDO, MSMEs, स्टार्ट‑अप्स, विश्वविद्यालयों और प्राइवेट इंडस्ट्री के साथ मिलकर काम करने की अपील की, ताकि भारतीय शिपबिल्डिंग को विश्व स्तर पर अग्रणी बनाया जा सके।
INS सूर्य का सफल लॉन्च भारतीय नौसेना की लॉजिस्टिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ देश की शिपबिल्डिंग उद्योग को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाने का संकेत है। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी तकनीक और उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।




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