भारतीय आईटी कंपनियों के ग्रीन कार्ड आवेदनों में गिरावट: टाटा, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल पर असर
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अमेरिका के परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) कार्यक्रम से भारतीय आईटी कंपनियों को निलंबित करने के बाद, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल ने ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की। यह बदलाव अमेरिकी नीतियों के प्रभाव को दर्शाता है, जबकि कंपनियों के कुल रोजगार पर प्रभाव अभी भी सीमित प्रतीत होता है।
पीईआरएम आवेदनों में गिरावट के आंकड़े
पीईआरएम आवेदनों के विश्लेषण के अनुसार, प्रमुख भारतीय आईटी कंपनियों ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन में तीव्र कमी देखी:
- टीसीएस: 2024 में 1,804 आवेदन, 2025 में 513, और 2026 में केवल 2 आवेदन।
- एचसीएल: 2024 में 323, 2025 में 59, और 2026 में 59 आवेदन।
- विप्रो: 2024 में 257 आवेदन (जिनमें 169 खारिज और 88 वापस ले लिए), 2025 में 523 आवेदन।
- इन्फोसिस: 2024 में 87 आवेदन; 2025‑2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं।
अन्य कंपनियों की स्थिति
निलंबन में शामिल अन्य कंपनियों में कैपजेमिनी और कॉग्निजेंट के आंकड़े भी उपलब्ध हैं:
- कैपजेमिनी: 2024 में 300, 2025 में 361, 2026 में 98 आवेदन।
- कॉग्निजेंट: 2024 में 1,236 आवेदन; 2025‑2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं।
प्रभाव का अनुमान
एचसीएल के पूर्व सीईओ विनीत नायर ने बताया कि 2022‑23 में जारी 1,17,849 पीईआरएम सर्टिफिकेट्स में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी 1,400 से भी कम, यानी दो प्रतिशत से कम थी। इस आधार पर, ग्रीन कार्ड आवेदन में गिरावट का प्रत्यक्ष प्रभाव शुरुआती अनुमान से कम हो सकता है।
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परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) क्या है?
अमेरिका के लेबर डिपार्टमेंट द्वारा जारी पीईआरएम किसी नियोक्ता को विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से काम पर रखने की अनुमति देता है। यह प्रक्रिया ग्रीन कार्ड (स्थायी निवास) प्राप्त करने का पहला कदम माना जाता है, जिससे भारतीय पेशेवरों के अमेरिकी रोजगार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मुख्य बातें
- टीसीएस ने 2026 में केवल 2 ग्रीन कार्ड आवेदन किए, जबकि 2024 में 1,804 थे।
- एचसीएल ने 2026 में 59 आवेदन किए, 2025 में 323 थे।
- विप्रो के 2024 के 257 आवेदनों में से 169 खारिज और 88 वापस ले लिए गए।
- इन्फोसिस ने 2024 में 87 आवेदन किए; 2025‑2026 के आंकड़े उपलब्ध नहीं।
- कुल पीईआरएम सर्टिफिकेट्स में भारतीय आईटी कंपनियों की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से कम।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि अमेरिकी नीतियों के कारण भारतीय आईटी कंपनियों की ग्रीन कार्ड आवेदन संख्या घट रही है, परंतु कुल रोजगार पर प्रभाव अभी तक सीमित दिख रहा है। भविष्य में नीति में बदलाव या कंपनियों की रणनीति में परिवर्तन इस प्रवृत्ति को बदल सकता है।




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