इंडियन आइडल के सिंगर बनें क्रिकेट अंपायर, पराशर जोशी को ऑस्ट्रेलिया में बड़ी जिम्मेदारी
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पुणे के रहने वाले पराशर जोशी ने संगीत और खेल दोनो ही क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। एक समय इंडियन आइडल के पियानो राउंड में मंच पर थे, आज वे बीसीसीआई‑क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ऑस्ट्रेलिया में प्रमुख घरेलू टूर्नामेंटों में अंपायरिंग करेंगे।
पराशर जोशी की दोहरी यात्रा
पराशर जोशी ने 2008 में इंडियन आइडल सीजन 4 के पियानो राउंड तक पहुँच कर संगीत जगत में कदम रखा, पर शो से बाहर हो जाने के बाद उन्होंने अपने करियर की दिशा बदल दी। क्लब स्तर पर क्रिकेट खेलने के बाद, उन्होंने नियमों की गहरी समझ हासिल कर अंपायरिंग को अपना पेशा बना लिया।
अंपायरिंग में प्रगति
2015 में बीसीसीआई ने उन्हें आधिकारिक अंपायर पैनल में शामिल किया। तब से उन्होंने रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, विजय हजारे, देवधर ट्रॉफी जैसे प्रमुख प्रथम‑क्लास टूर्नामेंटों में 19 फर्स्ट‑क्लास मैच, 32 लिस्ट‑ए मैच और 40 टी20 मुकाबले अंपायर किए हैं। इसके अलावा उन्होंने आईपीएल, सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और महिला प्रीमियर लीग के मैचों में भी भाग लिया है।
बीसीसीआई‑क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम
रणजी ट्रॉफी सीजन के दौरान बीसीसीआई और क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने अंपायरों के एक्सचेंज की नई पहल शुरू की। इस कार्यक्रम के तहत ऑस्ट्रेलियाई अंपायर बेन ट्रेलोर भारत में दो रणजी ट्रॉफी मैचों में अंपायरिंग कर रहे हैं, जबकि पराशर जोशी को ऑस्ट्रेलिया भेजा गया है।
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ऑस्ट्रेलिया में निर्धारित जिम्मेदारियां
- 11‑14 नवंबर: ब्रिस्बेन में क्वींसलैंड बनाम तस्मानिया के बीच शेफील्ड शील्ड के चार दिवसीय मैच में मैदानी अंपायर।
- 16 नवंबर: उसी मैदान पर आयोजित ऑस्ट्रेलिया के घरेलू वनडे कप में मैदानी अंपायर।
- 22‑25 नवंबर: सिडनी के ऐतिहासिक ग्राउंड में न्यू साउथ वेल्स बनाम क्वींसलैंड के बीच शेफील्ड शील्ड मैच में अंपायरिंग।
मुख्य बातें
- पराशर जोशी ने 2008 में इंडियन आइडल सीजन 4 के पियानो राउंड तक पहुंच बनाई।
- 2015 में बीसीसीआई के आधिकारिक अंपायर पैनल में शामिल हुए।
- रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, आईपीएल आदि में कुल 91 प्रथम‑क्लास और टी20 मैचों का अनुभव।
- बीसीसीआई‑क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया अंपायर एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत ऑस्ट्रेलिया में शेफील्ड शील्ड और वनडे कप के मैचों में अंपायरिंग करेंगे।
- ऑस्ट्रेलिया में 11‑25 नवंबर के बीच तीन प्रमुख मैचों में उनकी जिम्मेदारी रहेगी।
भविष्य की संभावनाएं
पराशर जोशी की इस अंतरराष्ट्रीय अंपायरिंग यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत करियर को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी, बल्कि भारत‑ऑस्ट्रेलिया अंपायर सहयोग को भी सुदृढ़ करेगी। यदि उनका प्रदर्शन सकारात्मक रहा, तो भविष्य में अधिक भारतीय अंपायरों को इसी तरह के एक्सचेंज प्रोग्राम में भाग लेने का अवसर मिल सकता है।
संगीत और खेल दोनों में सफलता हासिल करने वाले पराशर जोशी का उदाहरण युवा वर्ग के लिए प्रेरणा बन सकता है, जो किसी भी क्षेत्र में असफलता के बाद भी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं।




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