उपरोक्त हाई कोर्ट के आदेश से KGBV शिक्षकों को स्थायी पद मिलने की राह में चार महीने
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उच्च न्यायालय ने कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के संविदा शिक्षकों के नियमितीकरण को लेकर यूपी सरकार को चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कई वर्षों तक संविदा पर काम करने और कम मानदेय मिलने को बंधुआ मजदूरी के रूप में पहचानते हुए इस मुद्दे को गंभीरता से लिया।
हाई कोर्ट का आदेश
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि KGBV शिक्षकों के नियमितीकरण पर सरकार को शीघ्रता से कार्य करना चाहिए। आदेश में यह भी कहा गया कि चार महीने की अवधि के भीतर सरकार को अपने विचार प्रस्तुत करने होंगे, जिससे शिक्षकों को स्थायी पद मिलने की प्रक्रिया तेज हो सके।
संविदा पर काम करने की स्थिति
कई वर्षों से KGBV शिक्षकों को संविदा आधार पर काम करना पड़ रहा है, जबकि उनका वेतन सामान्य सरकारी शिक्षकों की तुलना में काफी कम है। अदालत ने इस असमानता को ‘बंधुआ मजदूरी’ के रूप में वर्गीकृत किया, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता स्पष्ट हुई।
सरकार की प्रतिक्रिया और अगले कदम
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद, यूपी सरकार को अब इस दिशा में कार्यवाही करनी होगी। चार महीने की समय सीमा के भीतर नियमितीकरण के प्रस्ताव, वेतन संरचना में सुधार और अन्य संबंधित नीतियों पर विचार किया जाएगा। यदि सरकार समय पर निर्णय नहीं लेती, तो अदालत के पास आगे की कार्यवाही करने का अधिकार रहेगा।
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मुख्य बातें
- उच्च न्यायालय ने KGBV शिक्षकों के नियमितीकरण पर सरकार को चार महीने में विचार करने का निर्देश दिया।
- संविदा पर कम वेतन को अदालत ने बंधुआ मजदूरी कहा।
- सरकार को अब स्थायी पद, वेतन सुधार और संबंधित नीतियों पर निर्णय लेना होगा।




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