गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी ने किया कन्या पूजन, कन्याओं को कराया भोजन
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गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में महानवमी के पावन अवसर पर एक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधिवत् कन्या पूजन किया। इस समारोह में उपस्थित महिलाओं को तिलक लगाकर भोजन कराया गया और इस परम्परा को सनातन धर्म में मातृशक्ति के सम्मान के रूप में उजागर किया गया।
कन्या पूजन का विवरण
मुख्यमंत्री ने मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थित मंच से कन्याओं के माथे पर रोली, चंदन, दही और अक्षत का तिलक लगाया। तिलक लगाने के बाद, सभी उपस्थित महिलाओं को विशेष रूप से तैयार किए गए भोजन का वितरण किया गया। इस दौरान सीएम ने कहा कि कन्या पूजन सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण परम्परा है, जो मातृशक्ति के प्रति सर्वोच्च सम्मान को दर्शाती है।
धार्मिक महत्व
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मां भगवती की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस परम्परा के अनुसार, कन्याओं को सम्मानित करके समाज में महिलाओं के अधिकारों और सम्मान को सुदृढ़ किया जाता है। उन्होंने कहा, “मातृशक्ति को सम्मान देना हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है और इस प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक एकता को भी बढ़ाते हैं।”
मुख्य बातें
- गोरखनाथ मंदिर में महानवमी के अवसर पर सीएम योगी ने विधिवत् कन्या पूजन किया।
- कन्याओं के माथे पर रोली, चंदन, दही और अक्षत का तिलक लगाया गया।
- पूजन के बाद सभी उपस्थित महिलाओं को विशेष भोजन कराया गया।
- सीएम ने इसे सनातन धर्म में मातृशक्ति के सम्मान की परम्परा बताया।
- चैत्र और शारदीय नवरात्रि में मां भगवती की आराधना के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व है।
समारोह की प्रतिक्रिया
समारोह में उपस्थित स्थानीय श्रद्धालु और महिला प्रतिनिधियों ने इस पहल की सराहना की। कई महिलाओं ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में मददगार होते हैं और महिलाओं के सम्मान को सुदृढ़ करते हैं।
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भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की संभावना
सीएम योगी ने संकेत दिया कि भविष्य में भी ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे मातृशक्ति के सम्मान को और अधिक प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार महिलाओं के अधिकारों को सुदृढ़ करने के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है।
गोरखनाथ मंदिर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक भावना को जागृत किया, बल्कि सामाजिक स्तर पर महिलाओं के सम्मान को भी एक नई दिशा दी। यह पहल उत्तर प्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।




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