FCRA संशोधन विधेयक पर JPC की बैठक: चर्च प्रतिनिधियों ने जताई कड़ी आपत्ति
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संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने आज FCRA 2026 संशोधन विधेयक पर चर्च, इस्कॉन, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और रामकृष्ण मिशन सहित कई संगठनों के प्रतिनिधियों की आपत्तियों को सुना। प्रतिनिधियों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों को अल्पसंख्यक NGOs और सामाजिक‑कल्याण संस्थानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया।
JPC की बैठक में उपस्थित प्रमुख संगठनों के प्रतिनिधि
जून के मध्य में शुरू हुई JPC की इस बैठक में निम्नलिखित संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपना पक्ष रखा:
- इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI)
- कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI)
- ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल (OICC)
- सेंटर फॉर एडवांसमेंट ऑफ फिलैंथ्रॉपी (CEFP)
- इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस)
- शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति
- रामकृष्ण मिशन
प्रतिनिधियों की मुख्य आपत्तियां
सभी प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रस्तावित विधेयक के कुछ प्रावधानों से उनके संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता, विदेशी दान की प्राप्ति और सामाजिक कार्यों पर प्रतिबंध लग सकता है। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर आपत्ति जताई:
- विदेशी दान की सीमा को घटाकर 25 लाख रुपये प्रति वर्ष करना, जिससे कई छोटे NGOs की कार्यक्षमता प्रभावित होगी।
- वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए अतिरिक्त ऑडिट आवश्यकताओं को लागू करना, जो कई संगठनों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ा देगा।
- ‘अल्पसंख्यक’ शब्द के प्रयोग को लेकर अस्पष्टता, जिससे NGOs को अनावश्यक जांच का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार का रुख
विधेयक के विरोध में उठाए गए आरोपों को सरकार ने खारिज कर कहा कि FCRA 2026 संशोधन में कोई भी प्रावधान अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव नहीं करता। सरकार का कहना है कि यह संशोधन राष्ट्रीय सुरक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और विदेशी फंडिंग की निगरानी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किया गया है।
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जांच और आगे की प्रक्रिया
JPC के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि समिति ने सभी पक्षों की बात को ध्यानपूर्वक सुना है। अब समिति के अगले चरण में इन आपत्तियों पर विस्तृत चर्चा होगी और आवश्यकतानुसार संशोधन प्रस्ताव पर पुनः विचार किया जाएगा।
मुख्य बातें
- JPC ने आज FCRA 2026 संशोधन विधेयक पर कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की आपत्तियां सुनीं।
- प्रतिनिधियों ने विदेशी दान की सीमा, अतिरिक्त ऑडिट और ‘अल्पसंख्यक’ शब्द के प्रयोग को लेकर विरोध जताया।
- सरकार ने इन आपत्तियों को खारिज कर कहा कि विधेयक में कोई भेदभाव नहीं है।
- अगली बैठक में JPC इन सुझावों पर चर्चा करेगी और आवश्यक संशोधनों पर विचार करेगी।
विधेयक की अंतिम स्थिति अभी अनिश्चित है, लेकिन यह स्पष्ट है कि विभिन्न सामाजिक‑धार्मिक समूहों की आवाज़ें संसद में बहु‑पक्षीय चर्चा को प्रभावित कर सकती हैं।




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