दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में पैदल चलने की सुरक्षा संकट
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भारत के बड़े शहरों में पैदल चलना अब जोखिम भरा बनता जा रहा है। तेज गति वाली गाड़ियां, फुटपाथों पर अतिक्रमण, सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी और दुर्घटना के बाद चालक का भाग जाना, इन सब कारणों से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता में पैदल यात्रियों की मौतों में वृद्धि देखी जा रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर पैदल यात्रियों की मौतें
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में उस वर्ष 35,221 पैदल यात्रियों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत हुई, जो कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 20.4 % था। 2024 की रिपोर्ट में यह संख्या 36,526 तक बढ़ी। तमिलनाडु (4,712), बिहार (4,149) और महाराष्ट्र (3,344) में सबसे अधिक मौतें दर्ज हुईं।
दिल्ली में स्थिति
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2026 से 15 अक्टूबर 2026 तक दिल्ली में 524 पैदल यात्रियों की मौत हुई। 2025 में यह संख्या 649 थी, जिसमें 330 मामलों में कारण दर्ज नहीं किया गया। ट्रैफिक पुलिस ने बताया कि रात के समय और तेज गति वाले मार्गों पर जोखिम अधिक है। 2024 में 584, 2023 में 622 और 2022 में 629 पैदल यात्रियों की मौतें दर्ज हुईं। प्रमुख जोखिम वाले स्थानों में रिंग रोड, आउटर रिंग रोड और ग्रैंड ट्रंक रोड शामिल हैं, जहाँ फुटपाथ टूटे या अतिक्रमित होते हैं।
बेंगलुरु में पैदल यात्रियों की मौतें
NCRB के 2023 के आंकड़ों में बेंगलुरु ने 53 प्रमुख शहरों में पैदल यात्रियों की मौत के मामले में पहला स्थान हासिल किया। शहर में 292 पैदल यात्रियों की मौत और 1,021 घायल हुए। मुख्य कारणों में टूटे फुटपाथ, अतिक्रमण, गड्ढे और सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी बताई गई। 2022 में भी बेंगलुरु में 247 पैदल यात्रियों की मौत दर्ज हुई, जो लगातार दो सालों में सबसे अधिक थी।
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मुंबई में हिट‑एंड‑रन की बढ़ती समस्या
मुंबई में 2023 में कुल 374 सड़क दुर्घटना मौतें हुईं, जिनमें 151 पैदल यात्री थे। ब्लूमबर्ग फ़िलैंथ्रोपीज और मुंबई ट्रैफिक पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में सभी जानलेवा सड़क हादसों में 38 % हिट‑एंड‑रन के मामले थे, और इन मामलों में 54 % मृतक पैदल यात्री थे। 2023 में 72 % मृतक पुरुष थे और 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुए।
चेन्नई में सुरक्षा चुनौतियां
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में चेन्नई में 5,686 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिसमें 187 पैदल यात्रियों की मौत हुई। 2022 में तमिलनाडु ने पैदल यात्रियों की मौत के मामले में पहला स्थान हासिल किया, कुल 4,427 मौतें। प्रमुख समस्याओं में भारी ट्रैफिक, सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी और फुटपाथ की खराब स्थिति शामिल हैं।
कोलकाता में फुटपाथ की समस्या
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता में 2024 में 79 पैदल यात्रियों की मौत हुई, जो कुल 191 सड़क दुर्घटना मौतों का 41 % था। 2023 में यह संख्या 72, 2022 में 78, 2021 में 78 और 2020 में 94 थी। फुटपाथों का टूटना, अतिक्रमण और सुरक्षित क्रॉसिंग की कमी प्रमुख कारण बताये गए।
गड्ढों से जुड़ी दुर्घटनाएं
2020‑2024 के बीच गड्ढों से जुड़ी दुर्घटनाओं में कुल 9,438 लोगों की मौत हुई, जिसमें 53 % की वृद्धि देखी गई। उत्तर प्रदेश में 5,127 मौतें दर्ज हुईं, जबकि मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और पंजाब में क्रमशः 969, 612 और 414 मौतें हुईं।
मुख्य बातें
- 2024 में भारत में 36,526 पैदल यात्रियों की मौतें दर्ज हुईं।
- दिल्ली में 2026 के पहले 10 महीनों में 524 पैदल यात्रियों की मौतें हुईं।
- बेंगलुरु ने 2023 में पैदल यात्रियों की मौत के मामले में देश में पहला स्थान हासिल किया (292 मौतें)।
- मुंबई में 2023 में 38 % सड़क हादसे हिट‑एंड‑रन थे, जिनमें 54 % मृतक पैदल यात्री थे।
- कोलकाता में 2024 में पैदल यात्रियों की मौतें कुल सड़क दुर्घटना मौतों का 41 % थीं।
- गड्ढों से जुड़ी मौतें 2020‑2024 में 9,438 तक बढ़ी, उत्तर प्रदेश सबसे अधिक प्रभावित।
निष्कर्ष
फुटपाथों की खराब स्थिति, अतिक्रमण, तेज गति वाले वाहन और हिट‑एंड‑रन जैसी घटनाएं बड़े शहरों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल रही हैं। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर सड़कों की डिजाइन, फुटपाथों की मरम्मत और कड़ाई से ट्रैफिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि पैदल चलने वाले नागरिकों को सुरक्षित यात्रा मिल सके।




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