दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकारों के SC/ST एक्ट FIR पर नोटिस जारी, जांच पर रोक नहीं
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दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान दो पत्रकारों के खिलाफ दर्ज SC/ST एक्ट FIR पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इनकार किया और कहा कि पुलिस का जवाब मिलने के बाद ही मामले की गुण‑दोष के आधार पर सुनवाई होगी।
मामले की पृष्ठभूमि
3 अक्टूबर को जंतर‑मंतर/बूटा सिंह चौक के पास हुए विरोध प्रदर्शन में एक महिला पत्रकार ने कार्यकर्ता की हिरासत का वीडियो बनाते समय सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत पर अभद्र व्यवहार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। इस आरोप के जवाब में ACP विवेक भगत ने संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में महिला और एक पुरुष पत्रकार (जो ‘डिजी न्यूज़’ नामक संगठन के मालिक हैं) के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 221, 356(2) और 3(5) के तहत FIR दर्ज कराई।
हाई कोर्ट की सुनवाई
जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच के समक्ष इस FIR को चुनौती देने वाली पत्रकारों की याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने FIR को रोकने की याचिका को खारिज कर दिया और पुलिस को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल आपराधिक जांच जारी रहेगी और पुलिस का जवाब मिलने के बाद ही मामले की आगे की सुनवाई होगी।
मुख्य बातें
- FIR ACP विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज हुई, जिसमें पत्रकारों पर जातिसूचक टिप्पणी और सार्वजनिक अपमान का आरोप है।
- जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने जांच पर रोक नहीं दी, बल्कि पुलिस को नोटिस जारी किया।
- कोर्ट ने अगले सुनवाई की तिथि 17 नवंबर निर्धारित की।
- पत्रकारों के वकीलों का तर्क है कि FIR पत्रकारों को डराने के उद्देश्य से दर्ज की गई है।
- जांच अभी भी चल रही है और पुलिस का जवाब आने के बाद ही गुण‑दोष के आधार पर निर्णय होगा।
आगे की कार्यवाही
कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत नहीं दी। पुलिस को नोटिस के जवाब में अपने पक्ष को प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है। उत्तरदायी पक्षों के बयान और सबूतों की जांच के बाद, 17 नवंबर को निर्धारित सुनवाई में मामले के गुण‑दोष पर विचार किया जाएगा।
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न्यायिक प्रक्रिया का महत्व
यह मामला पत्रकारों और पुलिस अधिकारियों के बीच उत्पन्न हुए टकराव को न्यायिक मंच पर लाने का उदाहरण है। हाई कोर्ट ने प्रक्रिया के अनुसार दोनों पक्षों को सुनने और जांच को जारी रखने का आदेश दिया, जिससे न्यायिक पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।




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