दिल्ली की हवा दिवाली से पहले ही गंभीर श्रेणी के कगार पर, AQI 400 से ऊपर
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दिल्ली की हवा दिवाली से पहले ही ‘गंभीर’ श्रेणी के कगार पर पहुंच गई है। शुक्रवार को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 तक बढ़ा, जबकि कई मॉनिटरिंग केंद्रों पर 400 से ऊपर का मान दर्ज हुआ। ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान दिया, जिससे शहर में स्मॉग और दृश्यता में गिरावट आई।
वर्तमान वायु गुणवत्ता स्थिति
दिल्ली के 58 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 31 केंद्रों पर AQI ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में, 26 केंद्रों पर ‘गंभीर’ (Severe) श्रेणी में और केवल एक केंद्र (लोधी रोड) पर ‘खराब’ (Poor) श्रेणी में दर्ज किया गया। सबसे अधिक AQI पंजाबी बाग में 453, जहाँगीरपुरी में 447 और रोहिणी में 444 रहा।
मुख्य आँकड़े
- औसत AQI: 382 (गंभीर श्रेणी के करीब)
- सबसे अधिक AQI: पंजाबी बाग – 453
- ट्रांसपोर्ट सेक्टर का योगदान: 17.9%
- पराली जलाने का योगदान: 13%
- PM2.5 प्रमुख प्रदूषक
प्रदूषण के प्रमुख स्रोत
दिल्ली के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) के अनुसार, शुक्रवार को प्रदूषण फैलाने में प्रमुख योगदानकर्ता थे:
- ट्रांसपोर्ट सेक्टर – 17.9%
- पराली जलाना – 13%
- ऊर्जा उत्पादन – 1.4%
- उद्योग (आसपास) – 3.6%
- कचरा जलाना – 1.7%
- निर्माण कार्य – 2.7%
- सड़क की धूल – 1.3%
- घरेलू स्रोत – 4.4%
पड़ोसी राज्यों से भी पराली जलाने की घटनाओं ने दिल्ली की हवा को और बिगाड़ा। सैटेलाइट डेटा से पता चला कि 15 सितंबर से 5 नवंबर के बीच छह राज्यों में कुल 5,637 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें पंजाब (2,787) और मध्य प्रदेश (1,081) प्रमुख थे।
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GRAP‑3 आपातकालीन उपाय
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तीसरे चरण (GRAP‑3) को लागू कर दिया है। इस चरण में निम्नलिखित प्रतिबंध लागू हैं:
- धूल उड़ाने वाली और वायु प्रदूषण फैलाने वाली निर्माण एवं तोड़फोड़ कार्यों पर सख्त पाबंदियां
- विज्ञापन बोर्ड, पैनल और अन्य बड़े संरचनाओं की ध्वस्ति पर रोक
- विनिर्मित धुएँ वाले वाहन (जैसे डीजल जनरेटर) के उपयोग पर प्रतिबंध
- पार्किंग और ट्रैफिक प्रबंधन के माध्यम से वाहन उत्सर्जन को कम करना
विशेषज्ञों का मानना है कि दिवाली के पहले ही लोग पटाखे जलाना शुरू कर देंगे, जिससे हवा की गुणवत्ता और बिगड़ सकती है। साथ ही, उत्तर भारत में पराली जलाने की मौसमी वृद्धि भी इस समस्या को तीव्र कर रही है।
आगामी मौसम और चेतावनी
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम के अनुसार, 7 से 9 नवंबर के बीच दिल्ली की हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में रहने की संभावना है। इसके बाद के छह दिनों में ‘गंभीर’ और ‘बहुत खराब’ श्रेणियों के बीच उतार-चढ़ाव की आशंका है। वेंटिलेशन इंडेक्स 6,000 m³/सेकंड से कम और औसत हवा की गति 10 km/h से कम होने से प्रदूषकों का प्रसार रुकता नहीं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता है।
स्वास्थ्य पर प्रभाव
PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण श्वसन तंत्र में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं, जिससे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोग जैसी स्थितियों में वृद्धि की संभावना है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और रोगग्रस्त व्यक्तियों को बाहर निकलने से बचने और मास्क पहनने की सलाह दी गई है।
निष्कर्ष
दिवाली के उत्सवों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट, पराली जलाने और निर्माण कार्यों से उत्पन्न प्रदूषण ने दिल्ली की हवा को गंभीर स्तर के कगार पर पहुंचा दिया है। GRAP‑3 के तहत लागू प्रतिबंधों के साथ, नागरिकों को भी व्यक्तिगत स्तर पर सतर्क रहने, वाहन उपयोग कम करने और धुएँ वाले क्षेत्रों से बचने की आवश्यकता है।




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