CJP प्रदर्शन की जुलाई हिंसा की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी
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दिल्ली में 20 जुलाई को हुए CJP प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच अब क्राइम ब्रांच द्वारा की जाएगी। इस जांच में पथराव, तोड़फोड़, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और पुलिसकर्मियों पर हमले की साजिश को भी खंगाला जाएगा।
जांच का दायरा और फोकस
क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किए हैं। जांच का मुख्य फोकस 20 जुलाई को नई दिल्ली में हुए हिंसक घटनाक्रम में जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका तय करना है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि हिंसा पहले से सुनियोजित थी या प्रदर्शन के दौरान आपराधिक तत्व शामिल हुए।
सुनियोजित हिंसा या आपराधिक तत्व?
जांच का सबसे अहम सवाल यह है कि 20 जुलाई की हिंसा अचानक हुई थी या इसके पीछे कोई पूर्व योजना थी। क्राइम ब्रांच प्रदर्शन से पहले की गतिविधियों, विभिन्न स्थानों पर मौजूद लोगों और घटनाओं के बीच संभावित कड़ियों की जांच करेगी। साथ ही यह भी देखेगी कि प्रदर्शन स्थलों पर हिंसा फैलाने में किन लोगों की भूमिका थी और क्या अलग-अलग जगह हुई घटनाओं के बीच कोई आपसी संबंध था।
पुलिसकर्मियों पर हमले की जांच
20 जुलाई के प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई थी। 118 से अधिक पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए। पुलिस ने पथराव, सरकारी कर्मचारियों पर हमले और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में FIR दर्ज की थी। अब क्राइम ब्रांच यह पता लगाएगी कि पुलिसकर्मियों पर हमला करने और हिंसा फैलाने में कौन-कौन लोग शामिल थे।
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सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान
जांच के दायरे में पुलिस वाहनों समेत सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान को भी शामिल किया जाएगा। संसद मार्च के दौरान विभिन्न जगहों पर तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे थे। पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर प्रदर्शनकारियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू की थी। अब क्राइम ब्रांच CCTV, वीडियो फुटेज और दर्ज मामलों से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में FIR का मामला
जुलाई के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अगस्त में दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह CJP के 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR को आगे नहीं चलाना चाहती और नई FIR दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। 20 जुलाई की हिंसा के दौरान RAF जवानों पर कथित हमले के मामले में अलग FIR दर्ज किया गया था, जिसमें BNS की धाराओं के तहत सार्वजनिक सेवक पर हमले का मामला शामिल था। एक युवक को पैलेट से चोट लगने के मामले में भी अलग FIR दर्ज की गई थी।
मुख्य बातें
- दिल्ली में 20 जुलाई के CJP प्रदर्शन में पथराव, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों पर हमले हुए।
- क्राइम ब्रांच ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किए हैं।
- जांच का फोकस हिंसा की साजिश, सुनियोजित योजना और आपराधिक तत्वों की पहचान पर होगा।
- 118 से अधिक पुलिसकर्मी और लगभग 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए।
- सुप्रीम कोर्ट को 13 FIR को आगे नहीं चलाने और नई FIR दर्ज करने की अनुमति के लिए आवेदन किया गया।




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