चिराग पासवान ने कहा: अखिलेश यादव का ‘अटपटा’ फैसला, हार का डर है
3 मिनट में पढ़ें

उत्तरी प्रदेश में अगले साल निर्धारित विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हो गया है। समाजवादी पार्टी (एसपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी में यह ऐलान किया कि वह इस बार चुनाव नहीं लड़ेगे और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस बयान पर लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने तीखा जवाब दिया, इसे ‘अटपटा’ कहा और अखिलेश यादव के ‘हार के डर’ का उल्लेख किया।
चिराग पासवान का बयान
वाराणसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिराग पासवान ने कहा, “अखिलेश यादव का चुनाव न लड़ने का ऐलान अटपटा लगा। सेनापति को रण में नहीं, महल में बैठ कर युद्ध देखना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव लड़ना अखिलेश यादव की जिम्मेदारी है, क्योंकि वह अपने पार्टी के सैनिकों को मार्गदर्शन करने वाले अग्रणी नेता हैं।
हार के डर का उल्लेख
पासवान ने आगे कहा, “उन्हें हार का डर है, पार्टी के प्रदर्शन की चिंता है। लोकसभा में उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर झूठ बोला, लेकिन विधानसभा में जनता का भरोसा जीतना कठिन हो सकता है। महाराष्ट्र में जैसा हुआ, वहाँ विपक्ष ने लोकसभा में जीत हासिल की, पर विधानसभा में फिर से NDA को भारी मतों से जीत दिलाई। इसी तरह का डर अखिलेश को है।”
गठबंधन की अनिश्चितता
चिराग पासवान ने गठबंधन की स्थिति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “गठबंधन को लेकर अभी कोई औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है। अगर आपसी गठबंधन नहीं बन पाया तो एलजेपी (रामविलास) सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।” इस बयान से यह स्पष्ट हुआ कि एलजेपी अकेले ही पूरे उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, बशर्ते अन्य दलों के साथ समझौता न हो।
आपके लिए संबंधित खबरें
अखिलेश यादव का ऐलान
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा, “हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते हैं। इसलिए वही करेंगे जो हमारे लिए शुभ होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि 2012 में वह लोकसभा सदस्य रहते हुए सीधे मुख्यमंत्री बने थे, और इस बार भी वह लोकसभा सदस्य रहते हुए ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। जब उनसे पूछा गया कि पार्टी किस सीट से चुनाव लड़ेगी, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज़ में कहा, “तुम सीट बताओ।”
मुख्य बातें
- अखिलेश यादव ने कहा कि वह अगले साल के विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगे और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
- चिराग पासवान ने इस फैसले को ‘अटपटा’ कहा और अखिलेश के ‘हार के डर’ का उल्लेख किया।
- पासवान ने कहा कि अभी तक गठबंधन की कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।
- यदि गठबंधन नहीं बनता, तो एलजेपी सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी।
- अखिलेश ने 2012 में लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे, और इस बार भी वही तरीका अपनाने का इरादा जताया।
आगे क्या हो सकता है?
उपरोक्त बयानों के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति में कई संभावनाएँ उभर कर सामने आ रही हैं। यदि अखिलेश यादव वास्तव में चुनाव नहीं लड़े, तो समाजवादी पार्टी को अपने समर्थन आधार को बनाए रखने के लिए गठबंधन या अन्य रणनीति अपनानी पड़ेगी। दूसरी ओर, एलजेपी का 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का इरादा पार्टी को बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाने और उम्मीदवार चयन में चुनौतियों का सामना करवा सकता है। गठबंधन की औपचारिक बातचीत कब शुरू होगी, यह अगले कुछ हफ्तों में स्पष्ट होगा।
उत्तरी प्रदेश के मतदाता इस समय दोनों प्रमुख दलों के इरादों को बारीकी से देख रहे हैं, क्योंकि उनका वोट ही चुनावी परिणाम को तय करेगा।




टिप्पणियाँ
0