बेगूसराय में दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक कार्यक्रम में दारोगा पर थप्पड़ और पिस्टल लहराने का मामला
2 मिनट में पढ़ें

बिहार के बेगूसराय में दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पुलिस अवर निरीक्षक (SI) अनिल कुमार सिंह ने दो महिला डांसरों में से एक को थप्पड़ मारते हुए अपनी कमर से पिस्टल लहराई, जिससे कार्यक्रम स्थल पर हंगामा और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया और एसपी मनीष ने तुरंत दारोगा को निलंबित कर दिया।
घटना का विवरण
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पानगाछी स्थित दुर्गा मंदिर के पास दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में दो महिला डांसर गानों की धुन पर प्रस्तुति दे रही थीं। कार्यक्रम के दौरान पुलिस अवर निरीक्षक अनिल कुमार सिंह कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। डांसरों में से एक ने बताया कि दारोगा ने उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें थप्पड़ मार दिया। उसी समय दारोगा ने अपनी कमर से पिस्टल निकालकर लहराना शुरू किया, जिससे दर्शकों में अफरा-तफरी मच गई।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
थप्पड़ की खबर सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों में गुस्सा छा गया। कई लोगों ने दारोगा के खिलाफ विरोध किया और धक्का-मुक्की भी हुई। पिस्टल देख कर माहौल और तनावपूर्ण हो गया और कुछ समय के लिए स्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
पुलिस कार्रवाई
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद बेगूसराय पुलिस महकमे में हड़कंप मचा। एसपी मनीष ने तुरंत पुलिस अवर निरीक्षक अनिल कुमार सिंह को “ड्यूटी के दौरान लापरवाही और अमर्यादित आचरण” के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन के साथ ही उनके खिलाफ आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई गई।
आपके लिए संबंधित खबरें
मुख्य बातें
- बेगूसराय में दुर्गा पूजा के सांस्कृतिक कार्यक्रम में दारोगा ने महिला डांसर को थप्पड़ मार दिया।
- डारोगा ने अपनी कमर से पिस्टल निकालकर लहराया, जिससे दर्शकों में अफरा-तफरी मची।
- घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिससे सार्वजनिक प्रतिक्रिया तेज़ी से बढ़ी।
- एसपी मनीष ने पुलिस अवर निरीक्षक अनिल कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
- निलंबन के कारण दारोगा पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और आगे की जांच की संभावना है।
यह मामला पुलिस के अनुशासन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा प्रोटोकॉल की पुनः समीक्षा की आवश्यकता को उजागर करता है। आगे की जांच के बाद दारोगा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।




टिप्पणियाँ
0