अमेरिका से एशिया तक शेयर बाजार में कोहराम, फिर भी भारत का बाजार चट्टान जैसा स्थिर
3 मिनट में पढ़ें

अमेरिका में चिप कंपनियों की तेज़ गिरावट ने एशिया के शेयर बाजारों में कोहराम मचा दिया, लेकिन विदेशी निवेशकों की बंपर खरीदारी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण भारतीय शेयर बाजार ने चट्टान की तरह स्थिरता दिखाई।
वैश्विक बाजारों में गिरावट की लहर
वॉल स्ट्रीट से शुरू हुई बिकवाली की सुनामी ने एशिया के प्रमुख बाजारों को हिला दिया। जापान के निक्केई इंडेक्स में 7% की गिरावट, ताइवान में 9% की गिरावट और दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में 9% की भारी गिरावट दर्ज की गई। कोरिया में शुरुआती कारोबार में 8.55% गिरावट के बाद सर्किट ब्रेकर लगाकर 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग पूरी तरह रोक दी गई।
भारत का शेयर बाजार: चट्टान की तरह स्थिर
इन वैश्विक गिरावटों के बीच भारतीय बाजार ने कोई झटका नहीं महसूस किया। सुबह गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) ने कमजोर शुरुआत का संकेत दिया, पर बाजार खुलते ही सेंसेक्स 220.38 अंक (0.27%) की बढ़त के साथ 79,530.39 पर पहुंच गया। निफ्टी भी 5.31 अंक (0.02%) की हल्की बढ़त के साथ 24,541.90 पर हरे निशान में आया।
मुख्य शेयरों की चाल
- M&M (M&M) – 2.30% की तेज़ी
- इन्फोसिस – 2.01% की बढ़त
- टेक महिंद्रा – 1.34% की बढ़त
- TCS – 1.30% की बढ़त
- HCL टेक्नोलॉजीज – 1.26% की बढ़त
- पावर ग्रिड – 2.24% की गिरावट
- बजाज फाइनेंस – 2.14% की गिरावट
- इंडिगो – लगभग 2% की गिरावट
विदेशी निवेशकों की भूमिका
भारतीय बाजार की इस मजबूती का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों की बंपर खरीदारी है। पिछले दो साल से अधिक समय में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में अब तक की सबसे बड़ी खरीदारी की है, जिससे बाजार में तरलता और भरोसा बना रहा।
आपके लिए संबंधित खबरें
क्यों हुआ भारत का स्थिर प्रदर्शन?
1. ईरान युद्ध की संभावित समाप्ति की आशा – अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के परिणामों से पश्चिमी एशिया में चल रहे ईरान युद्ध के समाप्त होने की उम्मीद जगी, जिससे तेल की कीमतों में गिरावट आई। 2. अमेरिकी राजनीति में स्थिरता – अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण बढ़ने से व्हाइट हाउस की नीतियों में अनिश्चितता कम हुई, जिससे निवेशकों ने जोखिम भरे एआई शेयरों से पैसा निकालकर भारत जैसे स्थिर बाजार में लगा दिया। 3. सस्ते तेल का लाभ – तेल की कीमतों में साप्ताहिक गिरावट ने भारत को आयात लागत में राहत दी, जिससे कंपनियों के लाभ मार्जिन में सुधार हुआ।
अमेरिका में चिप शेयरों की गिरावट के प्रभाव
अमेरिका में चिप कंपनियों की पिटाई ने S&P 500 को 4.4% और नैस्डैक 100 को 6.4% तक गिरा दिया। इस गिरावट ने एशिया में एआई‑संबंधित शेयरों की बिकवाली को तेज़ कर दिया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स, एसके हाइनिक्स और ताइवान की TSMC जैसे प्रमुख चिप निर्माताओं के शेयर 9% से अधिक गिरे। जापान का निक्केई अब अपने उच्चतम स्तर से 20% नीचे आने की कगार पर है, जिसे तकनीकी रूप से ‘टेक्निकल बियर मार्केट’ कहा जाता है।
मुख्य बातें
- अमेरिका में चिप शेयरों की गिरावट से एशिया के बाजारों में 7‑9% तक की गिरावट हुई।
- दक्षिण कोरिया में सर्किट ब्रेकर लगाकर 20 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोक दी गई।
- भारतीय शेयर बाजार ने सेंसेक्स में 0.27% और निफ्टी में 0.02% की बढ़त दर्ज की।
- विदेशी निवेशकों ने पिछले दो साल में भारतीय शेयरों में अब तक की सबसे बड़ी खरीदारी की।
- तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी राजनीति में स्थिरता ने भारतीय बाजार को समर्थन दिया।
समग्र रूप से, वैश्विक शेयर बाजारों में भारी गिरावट के बावजूद भारतीय बाजार ने विदेशी निवेश, सस्ते तेल और राजनीतिक आशावाद के कारण स्थिरता बनाए रखी, जिससे निवेशकों को भरोसा मिला कि भारत का शेयर बाजार जोखिम के समय भी चट्टान की तरह खड़ा रह सकता है।




टिप्पणियाँ
0