इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोवंश तस्करी के शंकित वाहन की जब्ती रद्द की, मालिक को हर महीने 25,000 रुपये मुआवजा
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गोवंश तस्करी के शंकित एक बोलेरो पिकअप की जब्ती को रद्द कर दिया और वाहन मालिक को हर महीने 25,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ में सुनवाई के बाद आया, जिसमें जब्ती के आधार पर केवल अनुमान नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्य की आवश्यकता पर बल दिया गया।
केस की पृष्ठभूमि
मिर्जापुर के लालगंज थाना क्षेत्र में 5 फरवरी 2025 को पुलिस ने नेसर शाह नामक व्यक्ति की बोलेरो पिकअप (रजिस्ट्रेशन नंबर UP-65-DT-2650) को जब्त किया। पुलिस का कहना था कि वाहन में आठ बैल, एक गाय और एक बछड़ा सहित कुल दस मवेशियों को भरकर वध के उद्देश्य से बिहार ले जाया जा रहा था। इस आधार पर गोवध निवारण अधिनियम और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
जिलाधिकारी और आयुक्त के आदेश
जिलाधिकारी मिर्जापुर ने 19 मई 2025 को वाहन को राज्य सरकार के पक्ष में जब्त करने का आदेश दिया। बाद में विंध्याचल मंडल के आयुक्त ने 21 मई 2026 को पुनरीक्षण याचिका खारिज करते हुए जब्ती के आदेश को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल अनुमान और आशंका के आधार पर किसी वाहन को जब्त नहीं किया जा सकता। जब्ती के लिए कानून में निर्धारित शर्तों का पूरा होना और ठोस साक्ष्य आवश्यक है। कोर्ट ने नेसर शाह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामलों में जिलाधिकारी और आयुक्त के जब्ती संबंधी आदेशों को रद्द कर दिया।
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निर्णय के अनुसार, जब्त गाड़ी को तत्काल प्रभाव से रिलीज करने का आदेश दिया गया और गाड़ी जब्त रहने के प्रत्येक दिन के लिए मालिक को 25,000 रुपये के हिसाब से मुआवजा देने का निर्देश दिया गया।
पशु चिकित्सा जांच के निष्कर्ष
सुनवाई के दौरान यह भी स्थापित हुआ कि वाहन में मौजूद पशुओं की पशु चिकित्सा अधिकारी द्वारा जांच की गई थी और वे सभी स्वस्थ पाए गए। न तो गोमांस बरामद हुआ और न ही वध किए गए पशुओं के कोई अवशेष मिले। इस तथ्य ने अदालत को यह निष्कर्ष निकालने में मदद की कि तस्करी का आरोप पर्याप्त प्रमाणों पर आधारित नहीं था।
परमिट संबंधी कानूनी प्रावधान
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के भीतर गाय और उसकी संतान के परिवहन के लिए परमिट की आवश्यकता नहीं है। परमिट तभी अनिवार्य होता है जब पशुओं को उत्तर प्रदेश से बाहर ले जाया जा रहा हो। इस प्रावधान के आधार पर, पुलिस द्वारा किए गए जब्ती के आदेश में कानूनी त्रुटि थी।
मुख्य बातें
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बोलेरो पिकअप की जब्ती को अवैध करार दिया।
- वहिलास को तुरंत रिलीज करने और हर महीने 25,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश।
- जिलाधिकारी और आयुक्त के जब्ती आदेश रद्द।
- पशु चिकित्सा जांच में सभी पशु स्वस्थ पाए गए, कोई गोमांस या वध के अवशेष नहीं मिले।
- उत्तर प्रदेश के भीतर पशु परिवहन के लिए परमिट अनिवार्य नहीं, केवल बाहर ले जाने पर लागू।
- कोर्ट ने जब्ती के लिए ठोस साक्ष्य और कानून की शर्तों की आवश्यकता पर बल दिया।
यह फैसला उत्तर प्रदेश में पशु तस्करी के मामलों में पुलिस की कार्यवाही के मानक को पुनः परिभाषित करता है और भविष्य में केवल अनुमान पर नहीं, बल्कि ठोस प्रमाणों के आधार पर ही जब्ती आदेश जारी करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।




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