अमेठी के बुजुर्ग विनोद कुमार द्विवेदी को UDID में दर्ज गलत दिव्यांगता श्रेणी से सरकारी योजनाओं में बाधा
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उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के जामो थाना क्षेत्र में रहने वाले 70‑साल के बुजुर्ग विनोद कुमार द्विवेदी को सरकारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र में दर्ज गलत श्रेणी के कारण पाँच साल से आवश्यक सहायक उपकरण और योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह मामला तब उजागर हुआ जब उन्होंने स्थानीय मीडिया को अपनी समस्या बताई।
गलत UDID रिकॉर्ड की वजह से उत्पन्न कठिनाइयाँ
विनोद कुमार द्विवेदी पैर से दिव्यांग हैं और उन्हें चलने‑फिरने में सहायक उपकरणों की जरूरत है। लेकिन उनके यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) कार्ड में ‘लो‑विजन’ यानी कम दिखाई देने की समस्या दर्ज की गई है। इस त्रुटि के कारण उन्हें पैर‑संबंधी सरकारी योजनाओं, जैसे व्हीलचेयर, वॉकिंग स्टिक, और आयुर्वेदिक उपचार आदि का लाभ नहीं मिल रहा।
पाँच साल की निरंतर शिकायतें
विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने पिछले पाँच वर्षों में कई बार स्थानीय तहखाने, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक कल्याण कार्यालयों में शिकायत दर्ज कराई। प्रत्येक बार उन्हें आश्वासन मिला कि दस्तावेज़ सुधार दिया जाएगा, परंतु आज तक सही प्रमाण पत्र नहीं मिला। इस बीच, बुजुर्ग को रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए निजी खर्च करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
अमेठी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) अंशुमान सिंह ने बताया कि UDID पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण कई मामलों में गलत जानकारी दर्ज हो रही है। उन्होंने कहा कि पोर्टल की त्रुटियों को दूर करने के लिए कार्य जारी है, परंतु इस विशेष मामले को अभी तक उनके संज्ञान में नहीं लाया गया था। अंशुमान सिंह ने यह भी कहा कि यदि प्रमाण पत्र हाथ से बनाया गया होता तो यह विभागीय त्रुटि मानी जा सकती थी, परंतु पोर्टल‑आधारित प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है।
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सुधार की प्रक्रिया
CMO ने बताया कि जब तक तकनीकी समस्या हल नहीं होती, तब तक दस्तावेज़ में सुधार के लिए वैकल्पिक मैनुअल प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। उन्होंने विनोद कुमार को सलाह दी कि वे पुनः लिखित आवेदन के साथ स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी को प्रस्तुत करें, जिससे अस्थायी सुधार हो सके।
मुख्य बातें
- विनोद कुमार द्विवेदी पैर से दिव्यांग हैं, पर UDID में लो‑विजन दर्ज है।
- गलत श्रेणी के कारण वे सरकारी सहायक उपकरण और योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे।
- पिछले पाँच साल से उन्होंने कई बार शिकायत की, पर अभी तक सुधार नहीं हुआ।
- अमेठी के CMO अंशुमान सिंह ने पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी को कारण बताया।
- वर्तमान में मैनुअल सुधार प्रक्रिया की सलाह दी गई है, लेकिन आधिकारिक सुधार अभी बाकी है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि पोर्टल की तकनीकी समस्या शीघ्रता से हल हो जाती है, तो विनोद कुमार सहित कई अन्य दिव्यांग नागरिकों के दस्तावेज़ सही हो सकते हैं और वे सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ उठा पाएंगे। इस प्रकार, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की विश्वसनीयता और त्रुटि‑रहित डेटा एंट्री सुनिश्चित करना नीतिगत स्तर पर प्राथमिकता बननी चाहिए।
विनोद कुमार ने अंत में कहा कि वे आशा करते हैं कि जल्द ही उनका सही प्रमाण पत्र जारी हो और उन्हें आवश्यक सहायक उपकरण मिल सकें। उनका मामला अन्य दिव्यांग नागरिकों के लिए भी चेतावनी बन सकता है, जिससे सरकारी पोर्टल की निगरानी और सुधार की मांग बढ़ेगी।




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