विदेशी हाथ? हार्वर्ड पूर्व छात्रों की निंदा पर कपिल सिब्बल के भाई ने किया तीखा जवाब
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दिल्ली में चल रहे SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक नया मोड़ आया है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के 100 पूर्व छात्रों ने 10 अक्टूबर को पुलिस की बर्बरता, गैर‑कानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की निंदा करते हुए एक बयान जारी किया। इस बयान पर मशहूर वकील कपिल सिब्बल के भाई कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर ‘विदेशी हाथ’ का आरोप लगाते हुए तीखा जवाब दिया।
हार्वर्ड पूर्व छात्रों का बयान
हार्वर्ड के पूर्व छात्रों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का उल्लंघन किया है। उन्होंने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को उजागर किया:
- बर्बरता और अत्यधिक बल प्रयोग
- गैर‑कानूनी हिरासत
- संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन
बयान में यह भी कहा गया कि वे सरकार और सभी लागू करने वाली एजेंसियों से अपील करते हैं कि वे इन उल्लंघनों को तुरंत रोकें और जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराएँ।
कंवल सिब्बल का प्रतिवाद
कंवल सिब्बल ने ट्विटर (अब X) पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “विदेशी हाथ साफ नजर आ रहा है। यह प्रदर्शनकारियों के साथ मिलकर की जा रही बाहरी लामबंदी का ही एक हिस्सा है। हार्वर्ड के पूर्व छात्र इन अराजक प्रदर्शनों में क्यों शामिल हो रहे हैं?” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह बयान एक बाहरी एजेंडा का हिस्सा है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।
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हार्वर्ड क्लब ऑफ़ इंडिया का स्पष्टीकरण
बयान के बाद, हार्वर्ड क्लब ऑफ़ इंडिया ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी विरोध प्रदर्शन का समर्थन नहीं किया है। क्लब के एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्य रजत सेठी ने ANI को बताया कि कुछ पूर्व छात्र बिना क्लब की अनुमति के व्यक्तिगत रूप से बयान जारी कर रहे थे, और यह क्लब की ओर से नहीं था। इस स्पष्टीकरण ने यह स्पष्ट किया कि समूह के आधिकारिक तौर पर कोई राजनीतिक स्थिति नहीं है।
मुख्य बातें
- हार्वर्ड के 100 पूर्व छात्रों ने दिल्ली पुलिस की बर्बरता की निंदा की।
- कंवल सिब्बल ने इस बयान को ‘विदेशी हाथ’ का संकेत मानते हुए तीखा जवाब दिया।
- हार्वर्ड क्लब ऑफ़ इंडिया ने कहा कि उनका कोई आधिकारिक बयान नहीं है और कुछ पूर्व छात्रों ने व्यक्तिगत रूप से बयान जारी किया।
- विरोध प्रदर्शन SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर चल रहे हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफा मांग रहे हैं।
यह विवाद अभी भी जारी है और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रियाएँ देखी जाएँगी।




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