मुंबई के व्यापारियों ने 0.4% एमडीआर के विरोध में नो‑यूपीआई डे का आह्वान
2 मिनट में पढ़ें

मुंबई के कांदिवली और बोरीवली के बाजारों में व्यापारी 15 अक्टूबर से शुरू होने वाले “नो‑यूपीआई डे” का आह्वान कर रहे हैं। उनका विरोध 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के प्रस्तावित लागू होने के खिलाफ है, जो ₹2000 से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर लगाया जाएगा।
एमडीआर प्रस्ताव और व्यापारी का तर्क
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) द्वारा प्रस्तावित नियम के अनुसार, ₹2000 से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4% का डिस्काउंट रेट लागू किया जाएगा। व्यापारी इस शुल्क को सीधे अपनी कमाई से कटौती मानते हैं, जिससे उनकी लागत में वृद्धि होगी। कई छोटे और मध्यम आकार के व्यापारियों ने कहा कि यह अतिरिक्त खर्च उनके लाभ मार्जिन को घटा देगा।
नो‑यूपीआई डे का आयोजन
व्यापारी 15 अक्टूबर से “नो‑यूपीआई डे” मनाने की योजना बना रहे हैं। इस दिन वे ग्राहकों को कैश या कार्ड भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और यूपीआई के उपयोग को सीमित करेंगे। कंदोई हरीभाई दामोदर मिठाईवाला जैसे प्रतिष्ठानों में पहले बड़े पैमाने पर यूपीआई का उपयोग होता था, पर अब व्यापारी इस शुल्क के कारण डिजिटल भुगतान के बजाय पारंपरिक तरीकों को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं।
व्यापारियों की मुख्य चिंताएँ
- एमडीआर शुल्क सीधे उनकी जेब से जाएगा।
- लागत बढ़ने से छोटे व्यापारियों की लाभप्रदता घटेगी।
- डिजिटल भुगतान में कमी आ सकती है, जिससे आर्थिक डिजिटलाइजेशन पर असर पड़ेगा।
संभावित प्रभाव और आगे की दिशा
यदि एमडीआर लागू हो जाता है और व्यापारी इसे स्वीकार नहीं करते, तो डिजिटल भुगतान के उपयोग में गिरावट देखी जा सकती है। इससे सरकार के डिजिटल इंडिया पहल पर भी असर पड़ सकता है। व्यापारी अब तक इस शुल्क को वापस लेने या कम करने की मांग कर रहे हैं, ताकि यूपीआई के माध्यम से लेनदेन जारी रह सके।
आपके लिए संबंधित खबरें
मुख्य बातें
- कांदिवली और बोरीवली के बाजारों में व्यापारी 0.4% एमडीआर के विरोध में हैं।
- एमडीआर ₹2000 से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर लागू होगा।
- व्यापारी 15 अक्टूबर से “नो‑यूपीआई डे” मनाकर कैश/कार्ड भुगतान को बढ़ावा देंगे।
- डिजिटल भुगतान में संभावित गिरावट से डिजिटल इंडिया लक्ष्य पर असर पड़ सकता है।




टिप्पणियाँ
0