उरुग्वे ने भारत को 1-6 से हराया, अनिरुद्ध थापा ने 44 साल बाद इतिहास रचा
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कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में मंगलवार रात खेले गए अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडली फुटबॉल मैच में भारत को विश्व रैंकिंग 20वें नंबर की टीम उरुग्वे के हाथों 1-6 की भारी हार का सामना करना पड़ा। भारतीय मिडफ़ील्डर अनिरुद्ध थापा ने 22वें मिनट में गोल कर 44 साल बाद भारत‑उरुग्वे मुकाबले में बराबरी का क्षण लाया, पर बाद में बारिश और बिजली के कारण खेल रुकने के बाद उरुग्वे ने स्कोर को 6-1 तक बढ़ा दिया।
मैच की मुख्य घटनाएँ
मैच की शुरुआत में 11वें मिनट में भारत के प्रमवीर ने फेडेरिको विनास को पेनल्टी बॉक्स में गिराया, जिससे उरुग्वे के स्टार स्ट्राइकर डार्विन नुनेज ने पेनल्टी से 1-0 की बढ़त ली। 22वें मिनट में रेयान विलियम्स का शॉट उरुग्वे के गोलकीपर गैस्टन कार्डोजो को नहीं रोक सका, रिबाउंड पर अनिरुद्ध थापा ने गोल कर 1-1 की बराबरी बनाई।
गोल के बाद तेज बारिश और आसमानी बिजली के कारण खेल लगभग 30‑35 मिनट तक रुका रहा। पुनः शुरू होने पर उरुग्वे के नाहितान नांदेज के लो‑क्रॉस पर मैक्सिमिलियानो अराउजो ने गोल कर 2-1 की बढ़त ली। दूसरे हाफ में उरुग्वे के आक्रमण ने भारतीय डिफेंस को चकनाचूर कर दिया। 53वें मिनट में रोड्रिगो जालाजार ने बॉक्स के बाहर से बुलेट शॉट मारकर 3-1 कर दिया, उसके बाद अराउजो ने दूसरा गोल करके 4-1 कर दिया।
मैच के अंतिम चरण में मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व विंगर फाकुंदो पेलिस्ट्री ने दो असिस्ट किए, जिससे जुआन सानाब्रिया और रोड्रिगो अगुइरे ने क्रमशः गोल कर स्कोर 6-1 कर दिया।
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मुख्य बातें
- उरुग्वे ने भारत को 1-6 से हराया।
- अनिरुद्ध थापा ने 22वें मिनट में गोल कर 44 साल बाद भारत‑उरुग्वे इतिहास में बराबरी का क्षण लाया।
- मैच में तेज बारिश और बिजली के कारण 30‑35 मिनट का ब्रेक लगा।
- उरुग्वे के डार्विन नुनेज, मैक्सिमिलियानो अराउजो, रोड्रिगो जालाजार, जुआन सानाब्रिया और रोड्रिगो अगुइरे ने कुल पाँच गोल किए।
- फाकुंदो पेलिस्ट्री ने दो असिस्ट करके उरुग्वे के स्कोर को बढ़ाने में मदद की।
इतिहास का पुनरावर्तन
भारत ने 1982 के नेहरू कप में ईडन गार्डन्स पर उरुग्वे के खिलाफ अपना एकमात्र गोल मानस भट्टाचार्य ने किया था, जब भारत 1-3 से हार गया था। ठीक 44 साल बाद, उसी शहर (कोलकाता) में अनिरुद्ध थापा ने वही अवसर दोबारा बनाया, जिससे भारतीय फुटबॉल इतिहास में एक यादगार पन्ना जुड़ गया।
भविष्य की राह
भारी हार के बावजूद भारतीय टीम ने अपने युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुभव मिलने का अवसर प्राप्त किया। कोचिंग स्टाफ ने कहा कि इस तरह के मैत्रीपूर्ण मैचों से टीम की रणनीति और फिटनेस में सुधार होगा, और भविष्य के प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन की आशा है।




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