UPSC चैयरपर्सन ने कहा: इंटरव्यू में कैंडिडेट्स की जनसेवा की सोच को परखना आवश्यक
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के चैयरपर्सन डॉ. अजय कुमार ने हाल ही में सिविल सर्विस एग्जाम (CSE) के इंटरव्यू बोर्ड को कैंडिडेट्स की जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को परखने की सलाह दी। यह टिप्पणी सरकारी चैनल डी.डी. न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में दी गई, जिसमें उन्होंने पारदर्शिता, गोपनीयता और तकनीकी उन्नति के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
जनसेवा की सोच को इंटरव्यू में परखने की आवश्यकता
डॉ. अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि हर काबिल उम्मीदवार को जनसेवा में रुचि होना अनिवार्य नहीं है, परन्तु आयोग को उन उम्मीदवारों को चुनना चाहिए जो अपने जीवन को देश और लोगों की सेवा के लिए समर्पित करने को तैयार हों। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू बोर्ड को केवल शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता नहीं, बल्कि कैंडिडेट्स के सामाजिक दायित्व के प्रति दृष्टिकोण को भी मूल्यांकन करना चाहिए। यह आयोग की निरंतर अपनाई गई प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें इंटरव्यू के दौरान विशेष रूप से जनसेवा की इच्छा को जांचने की सलाह दी जाती है।
मुख्य बातें
- इंटरव्यू बोर्ड को कैंडिडेट्स की जनसेवा के प्रति समर्पण को परखना चाहिए।
- हर काबिल व्यक्ति को जनसेवा में रुचि होना आवश्यक नहीं, परन्तु चयन में इस पहलू को महत्व दिया जाएगा।
- UPSC ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए प्रोविजनल उत्तर जारी करने की प्रक्रिया अपनाई है।
- गोपनीयता बनाए रखने के साथ-साथ तकनीकी सुधारों के माध्यम से प्रक्रिया को तेज़ और सुरक्षित बनाया जा रहा है।
पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन
डॉ. अजय कुमार ने बताया कि UPSC का मुख्य लक्ष्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना है, जिससे उम्मीदवारों और जनता का आयोग पर भरोसा बना रहे। इस दिशा में आयोग ने परीक्षा के तुरंत बाद प्रोविजनल उत्तर जारी करने की पहल की है, जो डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से तेज़ी से जानकारी प्रदान करती है। साथ ही, उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में गोपनीयता भी आवश्यक है, ताकि बाहरी प्रभावों से आयोग की स्वतंत्रता बनी रहे।
तकनीकी सुधारों का प्रभाव
वर्तमान डिजिटल युग में तकनीकी प्रगति का असर सभी क्षेत्रों पर पड़ रहा है, और UPSC भी इससे अछूता नहीं है। चैयरपर्सन ने बताया कि आयोग अपने सिस्टम को अधिक कुशल बनाने, विभिन्न प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को घटाने और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए विभिन्न तकनीकी उपायों को अपनाता है। इन सुधारों से न केवल प्रक्रिया तेज़ होती है, बल्कि उम्मीदवारों को भी अधिक स्पष्टता मिलती है।
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आगे का मार्गदर्शन
डॉ. अजय कुमार ने यह भी कहा कि आयोग के विशेषज्ञ इस दिशा में लगातार काम कर रहे हैं, परन्तु इस पर निरंतर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने यह ज़ोर दिया कि जनसेवा के प्रति समर्पित उम्मीदवारों का चयन ही प्रशासनिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाता है और देश के विकास में सकारात्मक योगदान देता है।
इन बयानों के बाद, UPSC के भविष्य के चयन प्रक्रिया में जनसेवा की भावना को एक महत्वपूर्ण मानदंड के रूप में शामिल करने की संभावना स्पष्ट हो गई है, जिससे प्रशासनिक वर्ग में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना और भी प्रबल होगी।




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