UPI पर 2000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर चार्ज, 76% उपयोगकर्ता बदलेंगे भुगतान तरीका
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डिजिटल इंडिया के दौर में UPI ने भुगतान का प्रमुख माध्यम बनकर अपनी जगह पक्की कर ली है, लेकिन 15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से अधिक के P2M (व्यक्ति से व्यापारी) लेनदेन पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने से उपयोगकर्ताओं में बदलाव की लहर दौड़ रही है। लोकलसर्किल्स द्वारा किए गए सर्वे में इस नई नीति पर उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से सामने आई है।
सर्वे के मुख्य निष्कर्ष
- 76% उपयोगकर्ता 2000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं देना चाहते।
- केवल 14% उपयोगकर्ता अतिरिक्त शुल्क के बावजूद UPI का उपयोग जारी रखने को तैयार हैं।
- यदि चार्ज लागू हो जाता है, तो 27% उपयोगकर्ता नकद लेनदेन की ओर रुख करेंगे, 26% क्रेडिट कार्ड, 14% डेबिट कार्ड, 4% NEFT/IMPS और 9% अन्य बिना चार्ज वाले विकल्पों की तलाश करेंगे।
- 2% उपयोगकर्ता चार्ज लगते ही खरीदारी ही टाल देंगे।
उपभोक्ता की बैकअप योजना
सर्वे में बताया गया कि अधिकांश उपयोगकर्ता चार्ज के कारण अपने भुगतान के तरीके बदलने के लिए तैयार हैं। नकद लेनदेन को फिर से अपनाने की इच्छा 27% तक पहुंच गई है, जो डिजिटल भुगतान के बाद से सबसे बड़ी वापसी दर्शाती है। कार्ड-आधारित भुगतान (क्रेडिट और डेबिट) को मिलाकर 40% से अधिक उपयोगकर्ता विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
व्यापारियों की प्रतिक्रिया
लोकलसर्किल्स ने 32,000 से अधिक व्यापारियों से भी राय ली। 41% व्यापारी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि वे अपने खर्चे से MDR नहीं भरेंगे, जबकि केवल 17% इस खर्चे को उठाने को तैयार हैं। 9% व्यापारी बताते हैं कि वे UPI लेनदेन को ही नहीं अपनाते। 0.4% MDR के हिसाब से 5,000 रुपये के लेनदेन पर 20 रुपये और 50,000 रुपये पर 200 रुपये का शुल्क व्यापारी को देना पड़ेगा।
सरकारी दिशा-निर्देश
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR न तो सरकार का टैक्स है और न ही NPCI द्वारा वसूला जाता है। व्यापारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस शुल्क को ग्राहक से वसूल न करें। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है कि ग्राहक पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। 15 अक्टूबर से इस प्रणाली की कड़ी निगरानी की जाएगी। हालांकि, यदि कोई व्यापारी ग्राहक से गलत तरीके से शुल्क लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं हुई है, और रिफंड प्रक्रिया भी अभी तक निर्धारित नहीं हुई है।
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भविष्य में भुगतान का परिदृश्य
यदि MDR लागू हो जाता है और व्यापारी इसे ग्राहक से वसूलते हैं, तो बड़े मूल्य के UPI लेनदेन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नकद या कार्ड-आधारित भुगतान की ओर शिफ्ट हो सकता है। यह बदलाव न केवल डिजिटल भुगतान के विकास को प्रभावित करेगा, बल्कि व्यापारियों के राजस्व मॉडल और उपभोक्ता व्यवहार में भी परिवर्तन लाएगा।
मुख्य बातें
- 15 अक्टूबर 2026 से 2000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा।
- लोकलसर्किल्स के सर्वे में 76% उपयोगकर्ता अतिरिक्त शुल्क नहीं देना चाहते।
- केवल 14% उपयोगकर्ता चार्ज के बावजूद UPI जारी रखने को तैयार।
- नकद, क्रेडिट/डेबिट कार्ड और NEFT/IMPS जैसे विकल्पों की ओर शिफ्ट की संभावना।
- व्यापारी भी MDR को लेकर चिंतित, 41% इसे ग्राहक से नहीं वसूलेंगे।
- सरकार ने व्यापारी को ग्राहक से MDR वसूलने से रोकने का निर्देश दिया।




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