टॉक्सिक बैंक माहौल से बंधी 2 लाख की कीमत: मधुरिमा की दर्दभरी कहानी
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सरकारी नौकरी को अक्सर सबसे सुरक्षित करियर माना जाता है, परन्तु जब वही नौकरी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को तोड़ दे तो क्या होगा? पश्चिम बंगाल की 31 वर्षीय मधुरिमा की कहानी इस सवाल का उत्तर देती है। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद उन्हें एक सरकारी बैंक में 70,000 रुपये की सैलरी वाली पोस्ट मिली, परन्तु टॉक्सिक कार्यस्थल, छुट्टी न मिलने और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी। इस प्रक्रिया में उन्हें 2 लाख रुपये का बॉन्ड भरना पड़ा।
सरकारी नौकरी तक का सफर
मधुरिमा ने दो साल तक IBPS की तैयारी की और अक्टूबर 2022 में एक सरकारी बैंक में चयनित हुईं। उन्हें कर्नाटक के ग्रामीण इलाके में पोस्टिंग मिली। शुरुआती कुछ महीनों में सब ठीक लग रहा था – 70,000 रुपये की सैलरी के साथ HRA भी मिल रहा था। परन्तु जल्द ही कार्यस्थल की वास्तविकता सामने आई।
टॉक्सिक माहौल और स्वास्थ्य पर असर
मधुरिमा ने बताया कि वह रोज 12 घंटे से अधिक काम करती थीं, कभी‑कभी रविवार को भी काम करना पड़ता था। छुट्टियों की मंजूरी नहीं मिलती थी और काम के बीच वॉशरूम जाने की भी इजाजत नहीं थी। इस अत्यधिक दबाव ने उन्हें गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) से ग्रस्त कर दिया।
व्यक्तिगत जीवन पर प्रतिबंध
दिसंबर 2022 में शादी के चार दिन बाद ही उन्हें फिर से ट्रेनिंग पर बुला लिया गया, जिससे वह अपने पति और परिवार के साथ समय नहीं बिता पाईं। ग्रामीण इलाके में भाषा की दिक्कत के बावजूद उन्हें बैंक बंद होने के बाद बाहर जाकर नए खाते खोलने के लिए मजबूर किया जाता था। एक सीनियर अफसर ने उन्हें गाली‑गलौज की और कहा, “तुम लड़की हो, बैंकों में लड़कियों को नौकरी नहीं मिलनी चाहिए” – जिससे उनका मनोबल और गिर गया।
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मानसिक टूटन और इस्तीफ़ा
लगातार टॉक्सिक माहौल, छुट्टी न मिलने और डिप्रेशन की वजह से मधुरिमा के अंदर से सब कुछ टूट गया। बुरे सपने और गलत ख्याल आने लगे। फरवरी 2024 में जब उन्हें एक दोस्त की शादी के लिए भी छुट्टी नहीं मिली, तो उनका सब्र टूट गया। मार्च 2024 में उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
2 लाख का बॉन्ड
सरकारी बैंक की नीति के अनुसार नौकरी छोड़ने के लिए उन्हें 2 लाख रुपये का बॉन्ड भरना पड़ा। यह राशि उनके लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गई, परन्तु मानसिक शांति के लिए यह कदम अनिवार्य था।
नयी दिशा: रिमोट जॉब और पुनःस्थापना
बॉन्ड भरने के बाद मधुरिमा ने LinkedIn पर रिमोट जॉब की तलाश शुरू की। शुरुआती तौर पर उन्हें बेंगलुरु के एक स्टार्ट‑अप में 35,000 रुपये की नौकरी मिली, जो उनकी पूर्व सैलरी से आधी थी, परन्तु वहाँ उन्हें सुकून मिला। लगातार मेहनत के बाद आज उनकी सैलरी फिर से 60,000 रुपये हो गई है और वह हैदराबाद में अपने पति के साथ वर्क‑फ्रॉम‑होम कर रही हैं।
मुख्य बातें
- मधुरिमा ने 2 साल की तैयारी के बाद अक्टूबर 2022 में सरकारी बैंक में 70,000 रुपये की सैलरी वाली नौकरी पाई।
- कार्यस्थल पर 12 घंटे से अधिक काम, छुट्टी न मिलना और वॉशरूम जाने की इजाजत न होना टॉक्सिक माहौल बन गया।
- उन्हें गंभीर यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) और डिप्रेशन का सामना करना पड़ा।
- शादी के चार दिन बाद पुनः ट्रेनिंग पर बुलाए जाने से व्यक्तिगत जीवन पर असर पड़ा।
- एक सीनियर अफसर की लैंगिक भेदभावपूर्ण टिप्पणी ने मानसिक तनाव बढ़ा दिया।
- फरवरी 2024 में छुट्टी न मिलने के बाद उन्होंने मार्च 2024 में इस्तीफा दिया।
- नौकरी छोड़ने के लिए 2 लाख रुपये का बॉन्ड भरना पड़ा।
- रिमोट जॉब के माध्यम से उन्होंने फिर से 60,000 रुपये की सैलरी हासिल की और हैदराबाद में वर्क‑फ्रॉम‑होम कर रही हैं।
मधुरिमा की कहानी यह दर्शाती है कि सुरक्षित माना जाने वाला सरकारी करियर भी टॉक्सिक माहौल में व्यक्तिगत स्वास्थ्य और मनोबल को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। यह केस नियोक्ताओं को कार्यस्थल की मानसिक स्वास्थ्य नीतियों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।




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