सरगुजा में अंतरजातीय विवाह विवाद में बेटे ने पिता की हत्या, आरोपी को गिरफ्तार
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छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के पुटा गांव में अंतरजातीय विवाह को लेकर सामाजिक बहिष्कार के डर से पिता‑बेटे के बीच विवाद बढ़ा, और शुक्रवार को 50 वर्षीय परवल राम ने 70 वर्षीय मनिनाथ मझवार को मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
घटना की पृष्ठभूमि
मनिनाथ मझवार (70) अपने बेटे परवल राम (50) के साथ रहने वाले घर में रहते थे। परवल ने कुछ समय पहले एक दूसरी लड़की से विवाह किया और उसे अपने साथ रहने के लिए घर में लाया। इस कदम से मनिनाथ को डर लगा कि समाज उनका बहिष्कार कर देगा, जिससे उनका सामाजिक जीवन प्रभावित होगा। इस डर के कारण पिता‑बेटे के बीच अक्सर झगड़े होते रहे।
हत्याकांड का विवरण
शुक्रवार शाम को फिर से पिता और बेटे के बीच झगड़ा हुआ। मनिनाथ ने गाली‑गलौज की, जिससे परवल गुस्से में आ गया। उसने अपने पिता पर कई बार घूंसे मारे, जिससे गंभीर चोटें आईं और मनिनाथ मौके पर ही दम तोड़ गया। घटना के समय बुजुर्ग की पत्नी घर पर नहीं थीं; वह बाहर किसी काम से गई हुई थीं।
घटना के बाद की घटनाएँ
बुजुर्ग की पत्नी देर शाम घर लौटी और आंगन में अपने पति का खून से लथपथ शव देखा। घर में चीख‑पुकार मच गई और पड़ोसी इकट्ठा हो गए। परवल ने अपनी नई पत्नी को लेकर गांव से फरार हो गया। पुटा के सरपंच के पति नंदाराम ने रात 9 बजे पुलिस को सूचना दी।
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पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, घटनास्थल का निरीक्षण किया और शव को पोस्ट‑मॉर्टम के लिए भेजा। जांच के दौरान परवल राम को सूरजपुर के जयनगर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दी गई।
मुख्य बातें
- स्थान: सरगुजा, छत्तीसगढ़ – पुटा गांव, उदयपुर थाना
- पीड़ित: मनिनाथ मझवार, 70 वर्ष
- आरोपी: परवल राम, 50 वर्ष
- कारण: अंतरजातीय विवाह से उत्पन्न सामाजिक बहिष्कार का डर
- घटना की तिथि: शुक्रवार (सप्ताह के अंत में)
- पुलिस कार्रवाई: आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया
समाज में प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों ने इस हिंसक घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया और सामाजिक बहिष्कार के डर को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। कई सामाजिक कार्यकर्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अंतरजातीय विवाह को लेकर उत्पन्न भय को सामाजिक संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से दूर किया जाना चाहिए, न कि हिंसा के रूप में।
पुलिस ने मामले की पूरी जांच जारी रखी है और भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों की सिफारिश की है।




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