सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की, यूपी सरकार पर 10 लाख का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत को रद्द कर दिया और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह फैसला इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त करता है, जिसमें मुल्ला अफरोज को NSA हिरासत में रखा गया था।

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केस की पृष्ठभूमि

संभल (उत्तरी प्रदेश) में 2023 में हुई हिंसा में कई लोगों की मौत और कई घायल हुए। इस मामले में मुल्ला अफरोज को NSA के तहत एहतियाती हिरासत में रखा गया था, क्योंकि पुलिस ने दावा किया था कि वह भविष्य में सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने 29 अगस्त 2024 को सुनाया कि पुलिस द्वारा हिरासत में प्रस्तुत किए गए कथित कबूलनामे को एहतियाती हिरासत का वैध आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल कई आपराधिक मामलों की मौजूदगी एहतियाती हिरासत के लिए पर्याप्त नहीं है।

मुख्य कारण

  • पुलिस हिरासत में दिए गए कबूलनामे को आधार बनाकर NSA हिरासत का आदेश नहीं दिया जा सकता।
  • उपलब्ध सामग्री से यह आशंका नहीं सिद्ध हुई कि मुल्ला अफरोज भविष्य में हिंसा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा।
  • हाई कोर्ट के उस फैसले को निरस्त किया गया, जिसमें मुल्ला अफरोज की हिरासत बरकरार रखी गई थी।

उपरोक्त निर्णय के परिणाम

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जिससे सरकार को इस निर्णय के पालन में आर्थिक दंड का सामना करना पड़ेगा। यह जुर्माना सरकार की उस कार्रवाई के खिलाफ है, जिसमें बिना वैध आधार के NSA हिरासत जारी रखी गई थी।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की।
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला निरस्त हुआ।
  • उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
  • कोर्ट ने कहा कि पुलिस के कबूलनामे को एहतियाती हिरासत का आधार नहीं माना जा सकता।
  • भविष्य में ऐसी हिरासत के लिए स्पष्ट कानूनी मानदंडों की आवश्यकता पर बल दिया गया।

आगे की संभावनाएँ

इस फैसले के बाद, अन्य मामलों में भी NSA के तहत एहतियाती हिरासत के आदेशों की वैधता पर पुनरावलोकन हो सकता है। न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह भविष्य में किसी भी एहतियाती हिरासत के लिए ठोस साक्ष्य और कानूनी मानदंडों का पालन करे।

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