सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की लूनी नदी की चौड़ाई पर अधिकारियों को फटकारा
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राजस्थान की जोजरी-लूनी नदी की चौड़ाई को 8 मीटर बताने पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने यह भी उजागर किया कि उसी नदी पर बने पुल की चौड़ाई 1,782 मीटर दर्ज थी, जिससे आंकड़ों में स्पष्ट विसंगति सामने आई। यह मामला नदी के प्रदूषण, उसकी सीमाओं की निर्धारण और सरकारी आँकड़ों की विश्वसनीयता से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सवाल उठाए
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने लूनी नदी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कई प्रश्न उठाए। जस्टिस संदीप मेहता ने अधिकारियों से पूछा कि किस सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर नदी की चौड़ाई को सूखे मौसम में बहने वाले पानी के आधार पर तय किया गया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश नहीं है और अधिकारियों को अपने आँकड़ों का स्रोत बताने को कहा।
आंकड़ों में विसंगति
सुनवाई में प्रस्तुत डेटा के अनुसार, लूनी नदी पर बने पुल की चौड़ाई 1,782 मीटर बताई गई, जबकि नदी की वास्तविक चौड़ाई केवल 8 मीटर दर्ज की गई थी। जस्टिस मेहता ने इस अंतर को “बेतुका” कहा और कहा कि नदी की सीमाओं को केवल कम पानी वाले दिनों के आधार पर निर्धारित करना उचित नहीं है। उन्होंने बाढ़ के दौरान नदी के विस्तार को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संभावना
अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी गलत आंकड़े जानबूझकर प्रस्तुत कर रहे हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जस्टिस मेहता ने जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित करने की संभावना जताई और कहा कि यह मामला गंभीर है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि समिति को आंकड़ों में गड़बड़ी की जानकारी थी, तो उसे पहले ही कोर्ट के समक्ष लाना चाहिए था।
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राजस्थान सरकार का उत्तर
राजस्थान सरकार की ओर से पेश ASG एसवी राजू ने कहा कि यह पता लगाना होगा कि गलती जानबूझकर की गई या नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे की पूरी जांच करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी।
मुख्य बातें
- लूनी नदी की चौड़ाई 8 मीटर बताई गई, जबकि उसी नदी पर बने पुल की चौड़ाई 1,782 मीटर दर्ज थी।
- सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि किस आदेश के आधार पर सूखे मौसम में पानी को आधार बनाकर नदी की चौड़ाई तय की गई।
- जस्टिस संदीप मेहता ने कहा कि नदी की सीमाएं बाढ़ के दौरान भी देखनी चाहिए, न कि केवल कम पानी वाले दिनों में।
- जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित करने की संभावना जताई गई।
- राजस्थान सरकार ने कहा कि गलती जानबूझकर हुई या नहीं, इसकी जांच की जाएगी।
यह मामला न केवल नदी के प्रदूषण और उसकी सीमाओं की सही पहचान से जुड़ा है, बल्कि सरकारी आँकड़ों की विश्वसनीयता और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसे आँकड़ों को प्रस्तुत करने से पहले सभी पक्षों को सटीक और पूर्ण डेटा प्रदान करना अनिवार्य होगा।




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