सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से अस्पतालों के शेयरों में गिरावट, दवाओं पर मार्जिन पर चर्चा
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सुप्रीम कोर्ट की एक सख्त टिप्पणी ने भारत के प्रमुख कॉरपोरेट अस्पतालों के शेयरों को झटका दिया। अदालत ने दवाओं पर मनमाने मुनाफे को ‘नरसंहार’ कहकर निंदा की, जिससे अपोलो हॉस्पिटल्स, मैक्स हेल्थकेयर, फोर्टिस हेल्थकेयर आदि के शेयरों में 4‑6% तक की गिरावट दर्ज हुई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और मुख्य बिंदु
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दवाओं की कीमतों पर सुनवाई के दौरान अस्पतालों को ‘मरीजों को लूटने’ का आरोप लगाया। कोर्ट ने विशेष रूप से कैंसर की दवा का उदाहरण दिया, जहाँ 2,700 रुपये की दवा को 27,000 रुपये में बेचा जा रहा है। इस अत्यधिक मार्जिन को अदालत ने ‘नरसंहार’ कहा।
मुख्य बातें
- कोर्ट ने कहा कि कॉरपोरेट अस्पताल मरीजों को अपने मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर करते हैं।
- कैंसर की दवा का 10 गुना मार्जिन उजागर किया गया।
- केंद्रीय सरकार से सभी दवाओं की एमआरपी पर 16% समान मार्जिन तय करने का सुझाव मांगा गया।
- सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस सुझाव पर सहमति जताई।
- अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।
शेयर बाजार पर तत्काल असर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद 30 सितंबर के सुबह के कारोबार में प्रमुख अस्पतालों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई। अपोलो हॉस्पिटल्स, यथार्थ हॉस्पिटल और मैक्स हेल्थकेयर के शेयर 4‑6% तक गिरे। फोर्टिस हेल्थकेयर ने 5.2% की गिरावट दर्ज की, जबकि कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) ने 3.8% और एस्टर डीएम ने 4.2% गिरावट झेली। इस गिरावट का असर पूरे हेल्थकेयर सेक्टर पर पड़ा; निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1% और बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2% गिरकर बंद हुआ।
आर्थिक प्रभाव और विश्लेषकों की राय
मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, दवाओं और मेडिकल उपकरणों से अस्पतालों की कुल कमाई का 20‑35% हिस्सा आता है। यदि 16% मार्जिन लागू हो जाता है, तो अपोलो, मैक्स, एस्टर डीएम, मेदांता और फोर्टिस जैसे फार्मेसी‑आधारित अस्पतालों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। विशेष रूप से अपोलो का रिटेल फार्मेसी नेटवर्क बड़ा होने के कारण वह सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, नारायण और जुपिटर जैसे क्लिनिकल‑आधारित अस्पतालों पर इसका असर कम रहने की संभावना है। हालांकि, यह अभी तक कोई अंतिम आदेश नहीं है, बल्कि एक सुझाव है।
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आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत ने इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को तय की है। इस दौरान केंद्र सरकार और संबंधित अस्पतालों से विस्तृत जवाबी दस्तावेज़ मांगे गए हैं। यदि अदालत 16% मार्जिन को अनिवार्य करती है, तो दवा की कीमतों में व्यापक परिवर्तन और अस्पतालों की व्यावसायिक रणनीति में पुनः मूल्यांकन की संभावना है।
यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।




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