सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के आरोपियों पर जमानत को कठिन बना दिया
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डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्गों और रिटायर्ड लोगों की बचत लूटने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 28 अक्टूबर 2026 को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने ऐसे मामलों में जमानत को कठिन बनाने और ट्रायल से पहले सजा देने की संभावना पर टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणी
सुनवाई में सीजेआई ने कहा कि यदि कानून में गुंजाइश हो तो डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने से पहले सजा देना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे अपराधियों को किसी भी अदालत से जमानत पर रिहा होने से रोका जा सकता है, हालांकि यह अभी तक कोई नया कानून नहीं है।
बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले गिरोहों पर नाराजगी
केरल के एर्नाकुलम के 81 साल के बुजुर्ग के खिलाफ 1.90 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया। कोर्ट ने कहा कि यदि कानून में अनुमति हो तो ऐसे ‘क्रूर अपराधियों’ को ट्रायल से पहले सजा मिलनी चाहिए और उन्हें बेल ऑर्डर रद्द कर देना चाहिए।
डिजिटल अरेस्ट के आँकड़े
2026 में जनवरी से अगस्त तक देशभर में 21,900 से अधिक डिजिटल अरेस्ट शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 647 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगी गई। तुलना के लिए, 2024 में 1,23,672 शिकायतें और 1,935 करोड़ रुपये की ठगी, तथा 2025 में 58,239 शिकायतें और 1,211 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज हुई थी।
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कोर्ट ने उजागर की पाँच बड़ी कमियां
- KYC में कमी: बैंक खाते खोलते समय ग्राहक की पहचान की पर्याप्त जाँच नहीं होती।
- संदिग्ध लेन‑देनों पर रोक नहीं: बड़े ट्रांसफर पर तुरंत अलर्ट नहीं दिया जाता।
- बैंकिंग सिस्टम में अलर्ट की कमी: संदिग्ध लेन‑देनों पर पुलिस को तुरंत सूचना नहीं भेजी जाती।
- फिजिकल वेरिफिकेशन का अभाव: असामान्य ट्रांजैक्शन की पुष्टि के लिए ग्राहक से संपर्क नहीं किया जाता।
- पीड़ितों को मुआवजा न मिलना: बैंक की लापरवाही के कारण पीड़ित को नुकसान की भरपाई नहीं मिलती।
डिजिटल अरेस्ट क्या है और बचाव के उपाय
डिजिटल अरेस्ट एक साइबर ठगी का रूप है, जिसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या अदालत के अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर घंटों तक रोकते हैं और झूठे आरोपों के आधार पर पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। बुजुर्ग और रिटायर्ड लोग इस प्रकार के ठगी के प्रमुख शिकार होते हैं।
सावधानियां
- किसी भी फोन कॉल पर बिना पुष्टि के पैसे ट्रांसफर न करें।
- वीडियो कॉल पर अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें।
- बैंक की OTP, पासवर्ड या व्यक्तिगत जानकारी कभी साझा न करें।
- ठगी का शिकार होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज करें।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों के लिए जमानत को कठिन बनाने की संभावना जताई।
- बुजुर्गों और रिटायर्ड लोगों को निशाना बनाने वाले गिरोहों पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
- 2026 में 21,900 से अधिक शिकायतें और 647 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज हुई।
- कोर्ट ने KYC, अलर्ट सिस्टम, फिजिकल वेरिफिकेशन और मुआवजा व्यवस्था में पाँच बड़ी कमियों को उजागर किया।
- ठगी से बचने के लिए फोन पर पैसे न भेजें, पहचान की पुष्टि करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।




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