शरद पूर्णिमा 2026: रातभर जागरण से जुड़ी मान्यताएँ और माँ लक्ष्मी का भ्रमण
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शरद पूर्णिमा 2026 इस वर्ष 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है और इसे धन‑धान्य की वृद्धि तथा माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का शुभ अवसर माना जाता है। कई लोग इस रात को जागरण करके देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।
कोजागरी पूर्णिमा का अर्थ और माँ लक्ष्मी का भ्रमण
‘कोजागरी’ शब्द संस्कृत के ‘को जागर्ति’ (कौन जाग रहा है) से बना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन‑से भक्त जागकर उनकी आराधना कर रहे हैं। रात भर जागरण और पूजा करने से माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में धन‑सम्पदा में वृद्धि की आशा की जाती है।
चंद्रमा की 16 कलाएँ और अमृत वर्षा
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ पृथ्वी के सबसे निकट होता है। मान्यता है कि इस समय आकाश से अमृत बरसता है और चाँदनी में बैठने या चंद्रमा के दर्शन करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह ऊर्जा मन को शांति देती है और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।
खीर का प्रसाद और आरोग्यता
इस रात चावल और दूध की खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे चाँदनी में रखी जाती है। अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों से स्नात खीर में अमृत गुण आ जाते हैं, जिससे साल भर शरीर निरोग रहता है।
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ज्योतिषीय महत्व – लक्ष्मी नारायण राजयोग
शरद पूर्णिमा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और तुला राशि में बुध‑शुक्र के संयोग से ‘लक्ष्मी नारायण राजयोग’ बनता है। इस योग को धन‑सम्पदा, वैभव और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
पौराणिक कथा – श्रीकृष्ण का महारास
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ ‘महारास’ रचा था। चंद्रमा इस दृश्य को देखकर भाव‑विभोर हो गया, जिससे इस रात की आध्यात्मिक महत्ता और बढ़ गई।
मुख्य बातें
- शरद पूर्णिमा 2026, 25 अक्टूबर (रविवार) को मनाई जाएगी।
- कोजागरी पूर्णिमा के रूप में यह रात माँ लक्ष्मी के पृथ्वी पर भ्रमण से जुड़ी है।
- रातभर जागरण, खीर का प्रसाद और चंद्रमा की 16 कलाओं को विशेष मान्यता प्राप्त है।
- ज्योतिषीय रूप से ‘लक्ष्मी नारायण राजयोग’ बनता है, जो धन‑सम्पदा के लिए शुभ माना जाता है।
- पौराणिक कथा में इस रात भगवान श्रीकृष्ण का महारास भी उल्लेखित है।
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य ज्ञान पर आधारित है; GBNews India इसकी पुष्टि नहीं करता।




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