SCBA ने CJI सूर्य कांत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पर आपराधिक अवमानना याचिका दायर की
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सुप्रीम कोर्ट बार एसोसोसिएशन (SCBA) ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले वरिष्ठ पत्रकार निखिल वागले और सांसद संजय राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) की कार्यवाही शुरू करने के लिए याचिका दायर की। यह याचिका अटॉर्नी जनरल (Attorney General for India) की लिखित सहमति के बाद प्रस्तुत की गई है।
याचिका का आधार और SCBA का बयान
SCBA के अनुसार, वागले और राउत द्वारा दिए गए बयानों को जानबूझकर और सोच-समझकर तैयार किया गया था, जिसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की छवि को खराब करना और उसकी गरिमा को कम करना था। याचिका में “कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट” की धारा 15 के तहत यह आरोप लगाया गया है कि इन बयानों ने कोर्ट की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया।
निखिल वागले की टिप्पणी और माफी
दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के संबंध में जब CJI ने विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार किया, तो वागले ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से CJI के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट किया। बाद में वागले ने उस पोस्ट को डिलीट कर दिया और बिना शर्त माफी भी मांग ली, यह दावा करते हुए कि यह एक भावनात्मक प्रतिक्रिया थी।
संजय राउत पर आरोप
शिवसेना (उद्धव ठाकरे) नेता और सांसद संजय राउत पर भी SCBA ने झूठे बयानों का आरोप लगाया है। एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर उन्होंने कहा कि जज सत्ताधारी पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं, मुख्यमंत्रियों द्वारा आयोजित डिनर में भाग लेते हैं, और लंदन में जजों के साथ बैडमिंटन खेलने की तस्वीरें मौजूद हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि ये टिप्पणियां पहली नजर में अपमानजनक हैं और उनका मकसद सुप्रीम कोर्ट, विशेषकर मुख्य न्यायाधीश की प्रतिष्ठा को घटाना है।
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मुख्य बातें
- SCBA ने CJI सूर्य कांत के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले निखिल वागले और संजय राउत के खिलाफ आपराधिक अवमानना याचिका दायर की।
- याचिका अटॉर्नी जनरल की लिखित सहमति के बाद प्रस्तुत की गई।
- वागले ने विवादित पोस्ट डिलीट कर दी और बिना शर्त माफी मांगी।
- राउत पर झूठे बयानों और जजों के राजनीतिक कार्यक्रमों में भागीदारी के आरोप लगाए गए।
- SCBA का कहना है कि इन बयानों का उद्देश्य कोर्ट की गरिमा को कम करना है।
यह मामला अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है और आगे की सुनवाई के परिणामों का इंतजार है।




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