सौरभ दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से रिहा, जंतर मंतर प्रदर्शन मामले में मिली जमानत
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सिविल जस्टिस पार्टी (CJP) के सह-संस्थापक सौरभ दास और आशुतोष रांका को सात दिन बाद तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट (SCM) ने दोनों को जमानत देने का आदेश सुनाया, जिससे उनका हिरासत समाप्त हुआ।
पृष्ठभूमि
सौरभ दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर मंतर पर निर्धारित प्रदर्शन स्थल से जुड़े प्रतिबंधों के बावजूद बैरिकेड पार कर प्रवेश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें 14 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से उनकी हिरासत को तीन दिन और बढ़ाने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इस मांग को अस्वीकार कर रिहाई का आदेश दिया।
कोर्ट का निर्णय
स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने यह निर्णय लेते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर हिरासत बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने दोनों को जमानत प्रदान करते हुए कहा कि वे न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अपने अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- सौरभ दास और आशुतोष रांका को 7 दिन बाद तिहाड़ जेल से रिहा किया गया।
- जमानत का आदेश स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दिया।
- दोनों पर जंतर मंतर प्रदर्शन स्थल से जुड़ी बैरिकेड तोड़ने का आरोप था।
- दिल्ली पुलिस ने हिरासत बढ़ाने की मांग की, पर कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
- रिहाई के बाद दोनों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की सुनवाई का सामना करना होगा।
आगे की प्रक्रिया
जमानत मिलने के बाद भी सौरभ दास और आशुतोष रांका को मामले की सुनवाई में उपस्थित होना होगा। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि जमानत का अर्थ यह नहीं है कि आरोप समाप्त हो गए हैं, बल्कि यह केवल अस्थायी रिहाई है जब तक कि अंतिम फैसला नहीं सुनाया जाता।
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इस घटना ने राजनीतिक प्रदर्शन और पुलिस-न्यायिक प्रक्रिया के बीच के संतुलन पर चर्चा को फिर से उजागर किया है। विभिन्न राजनीतिक दल और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए हैं, लेकिन सभी ने न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान की आवश्यकता पर बल दिया है।




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