संजय राउत की नई किताब बोध कीर्तन: मोदी की प्रशंसा और विजय माल्या का बचाव
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शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने अपनी नई पुस्तक बोध कीर्तन में दो प्रमुख मुद्दों को उजागर किया है। एक ओर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अयोध्या दीपोत्सव पर दिए गए भाषण की प्रशंसा की, तो दूसरी ओर उन्होंने आर्थिक अपराधी घोषित विजय माल्या को बेगुनाह कहा, जिससे राजनीतिक और व्यावसायिक जगत में चर्चा का माहौल बन गया है।
प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा
राउत ने बोध कीर्तन में बताया कि अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो गैर-राजनीतिक भाषण दिया, वह विशेष रूप से प्रभावशाली था। उन्होंने इस भाषण को देश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरुत्थान के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
विजय माल्या का बचाव
किताब में राउत ने विजय माल्या को “धोखेबाज” कहने से इनकार किया और कहा कि माल्या का व्यापार पहले ही डूब चुका था। उन्होंने यह तर्क दिया कि माल्या ने कर्ज चुकाने में असमर्थता के कारण भारत छोड़ दिया, न कि किसी अपराध के इरादे से। इस बयान ने माल्या के खिलाफ जारी आर्थिक अपराधी की सूचियों पर पुनर्विचार की मांग को जन्म दिया है।
मुख्य बातें
- संजय राउत ने बोध कीर्तन में मोदी के अयोध्या दीपोत्सव भाषण की प्रशंसा की।
- राउत ने विजय माल्या को आर्थिक अपराधी घोषित करने के खिलाफ तर्क दिया।
- किताब में बताया गया कि माल्या का व्यापार पहले ही दिवालिया हो चुका था।
- इन बयानों से राजनीतिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में चर्चा तेज़ हुई है।
प्रतिक्रिया और संभावित प्रभाव
राउत के इन बयानों पर विभिन्न राजनीतिक दलों और व्यावसायिक समूहों ने प्रतिक्रिया दी है। कुछ ने इसे व्यक्तिगत राय कहा, जबकि अन्य ने इसे आर्थिक अपराधी सूची में बदलाव की मांग के रूप में देखा। इस प्रकार के बयान चुनावी माहौल में भी असर डाल सकते हैं, विशेषकर जब वे प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं और विवादित व्यावसायिक व्यक्तियों को जोड़ते हैं।




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