साहिल‑मुस्कान को फांसी कब होगी? 90‑दिन की अपील अवधि और संभावित विकल्प
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मेरठ के नीले ड्रम कांड में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है, परंतु उन्हें अपील के लिए 90 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में वे हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर सकते हैं, जिससे निचली अदालत का फैसला अस्थायी रूप से होल्ड हो जाएगा।
अपील की प्रक्रिया और संभावित चरण
निचली अदालत के फैसले के बाद, दोनों को 90 दिन की मोहलत दी गई है। इस समयावधि में यदि वे हाईकोर्ट में अपील दाखिल करते हैं, तो निचली अदालत का फैसला स्वतः ही निलंबित हो जाता है। हाईकोर्ट में अपील स्वीकार होने पर दो संभावनाएँ हैं:
- हाईकोर्ट निचली अदालत का फैसला बरकरार रखता है – तब आगे सुप्रीम कोर्ट और अंत में राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करने का अधिकार रहेगा।
- हाईकोर्ट निचली अदालत का फैसला बदल देता है – तब फांसी की सजा समाप्त हो जाएगी और मामले का निपटारा हो जाएगा।
मेरठ जेल में फांसी का इतिहास
मेरठ की चौधरी चरण सिंह जिला जेल में पिछले 50 वर्षों में कोई फांसी नहीं हुई है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, आखिरी फांसी 1975 में करम सिंह (मुजफ्फरनगर) को दी गई थी। यदि साहिल शुक्ला को फांसी दी जाती है, तो वह इस जेल में फांसी पाने वाला दूसरा पुरुष होगा, जबकि मुस्कान रस्तोगी इकलौती महिला फांसी होगी।
सुरेंद्र कोली का मामला
2014 में नोएडा के निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को मेरठ जेल में फांसी की तैयारी थी, परंतु समय पर फांसी टल गई। बाद में हाईकोर्ट‑सुप्रीम कोर्ट में अपील के बाद वह बरी हुई, परंतु जेल से रिहा होने के बाद हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मृत्यु हो गई।
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नीले ड्रम कांड की पृष्ठभूमि
कांड में मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत की हत्या मुस्कान रस्तोगी और उसके आशिक साहिल शुक्ला ने मिलकर की। सौरभ और मुस्कान का लव मैरिज था, परंतु बाद में मुस्कान ने साहिल से संपर्क किया। सौरभ को बाधा मानते हुए दोनों ने उसे मार डाला। हत्या के बाद शव को तीन टुकड़ों में काटकर नीले ड्रम में सीमेंट घोल के साथ डाल दिया, जिससे शव के टुकड़े सीमेंट में जम गए। इसके बाद वे हिमाचल प्रदेश में हनीमून मनाने गए, परंतु लौटते ही पुलिस ने उनका पता लगा कर गिरफ्तार किया।
मुख्य बातें
- निचली अदालत ने साहिल‑मुस्कान को फांसी की सजा सुनाई।
- दोनों को अपील के लिए 90 दिन की मोहलत दी गई है।
- हाईकोर्ट में अपील स्वीकार होने पर निचली अदालत का फैसला होल्ड हो जाएगा।
- हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के पास दया याचिका का विकल्प रहेगा।
- यदि फांसी लागू होती है, तो साहिल मेरठ जेल में दूसरा पुरुष फांसी वाला और मुस्कान इकलौती महिला फांसी वाली बनेंगी।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि साहिल‑मुस्कान हाईकोर्ट में अपील दाखिल करेंगे या नहीं, और यदि करेंगे तो उनका मामला किस दिशा में जाएगा। न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरणों का इंतजार किया जा रहा है।




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