रिटायर्ड IAS राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद केयरटेकर वरुण कुमार की फरारी पर 12 टीमें, 100 पुलिसकर्मी और 4 राज्यों में खोज अभियान
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भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर खोज अभियान शुरू कर दिया है। केयरटेकर वरुण कुमार को अब तक नहीं पकड़ा जा सका, जबकि 12 पुलिस टीमें, 100 से अधिक पुलिसकर्मी और चार राज्यों में 4 वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
मुख्य बातें
- केयरटेकर वरुण कुमार हत्या के बाद फरार, लाखों रुपए के जेवर, नकदी और मोबाइल साथ ले गया
- पुलिस ने 12 टीमें, 100+ पुलिसकर्मी, DCP और दो ADCP की निगरानी में खोज शुरू की
- तलाश में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के संभावित ठिकानों पर दबिश
- राकेश के बेटे सिद्धांत (सिद्ध) ने 12,000 किमी की यात्रा कर पिता को मुखाग्नि दी
- हत्या से तीन दिन पहले ही वरुण ने केयरटेकर का काम शुरू किया, एजेंसी ने दस्तावेज़ सत्यापित नहीं किए
हत्या के बाद केयरटेकर की फरारी
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि रात करीब 2:40 बजे वरुण कुमार घर से बाहर निकला। CCTV फुटेज में वह पिट्ठू बैग और झोला लिए हुए दिखा। दो किलोमीटर पैदल चलकर वह भदभदा चौराहे तक पहुँचा, जहाँ से उसने ऑटो‑रिक्शा लेकर ऑटो‑पोलिटेक्निक चौराहा, कमला पार्क होते हुए भोपाल रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ा। स्टेशन से वह प्लेटफ़ॉर्म 6 से प्लेटफ़ॉर्म 2 की ओर गया और लगभग 3:30 बजे दिल्ली लाइन की एक ट्रेन में सवार होकर भोपाल से बाहर निकल गया।
ट्रेन‑रूट और संभावित ठिकाने
पुलिस ने झांसी, ग्वालियर और आगरा के रेलवे स्टेशनों के CCTV फुटेज की जाँच शुरू कर दी। ग्वालियर तक पहुँचने के संकेत भी मिले हैं; रात 2:52 बजे उसे एक व्यक्ति के साथ बाइक पर देखा गया। ग्वालियर स्टेशन के कैमरों में भी उसके फुटेज मिलने की संभावना है।
तकनीकी सबूत
वरुण के पास राकेश अग्रवाल का मोबाइल भी था, जो बीना में कुछ समय के लिए सक्रिय हुआ और फिर बंद हो गया। पुलिस इस मोबाइल की लोकेशन, CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को जोड़कर उसके आगे के रूट का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
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पुलिस का बहु‑राज्यीय खोज अभियान
खोज में मध्य प्रदेश के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के संभावित ठिकानों पर दबिशें चल रही हैं। पंजाब के नाभा में वरुण के रिश्तेदारों से पूछताछ की गई, जबकि आगरा, मथुरा और ग्वालियर में उसके आधा दर्जन से अधिक रिश्तेदारों से जानकारी जुटाई जा रही है। वरुण का परिवार ग्वालियर की वाल्मीकि कॉलोनी में रहता है, पर उसके ठिकाने को लेकर अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली।
पिता का अंतिम संस्कार और परिवार की प्रतिक्रिया
राकेश अग्रवाल की हत्या की खबर मिलने के बाद उनका इकलौता बेटा सिद्धांत (सिद्ध) ने अमेरिका से भारत के लिए 12,000 किमी की यात्रा की। वह शुक्रवार को भोपाल पहुंचा और पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान कई IAS‑IPS अधिकारी, रिश्तेदार और परिचित मौजूद रहे। सिद्ध के अमेरिकी पत्नी ने भी श्रद्धांजलि दी।
केयरटेकर की नियुक्ति और संभावित कारण
राकेश अग्रवाल ने कुछ दिन पहले बीमार होने के कारण एक एजेंसी के माध्यम से केयरटेकर रखवाया था। पहले विनोद नाम के व्यक्ति को भेजा गया था; उसकी छुट्टी के बाद वरुण कुमार को नियुक्त किया गया। एजेंसी के अनुसार वरुण ने लगभग 25 दिन तक एजेंसी के साथ संपर्क में रहा और आधार कार्ड व पुलिस वेरिफिकेशन दस्तावेज़ प्रस्तुत किए थे, पर एजेंसी ने इन दस्तावेज़ों का सत्यापन नहीं किया।
पुलिस ने यह भी जांच शुरू कर दी है कि हत्या के बाद घर में सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी या नहीं। गैस सिलेंडर की पिन में कुछ फंसाया गया, एक सिलेंडर का रेगुलेटर खुला मिला, और प्रेस का प्लग काटकर सीधे स्विच बोर्ड में लगाया गया था, जिससे आग लगाकर सबूत मिटाने की संभावना पर सवाल उठे हैं।
पशु‑संबंधी जांच
राकेश के बंगले में तीन पालतू कुत्ते थे, जो सामान्यतः अनजान व्यक्ति को देखकर भौंकते थे, पर हत्या की रात उन्होंने कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं दी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कुत्तों को कोई नशीला पदार्थ तो नहीं दिया गया।
पुराने आर्थिक विवाद की जांच
लगभग 11 महीने पहले राकेश अग्रवाल ने अपने परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस आर्थिक विवाद और हत्या के बीच कोई सीधा संबंध नहीं पाया है, पर इस मामले की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
वर्तमान स्थिति
पुलिस ने अभी तक वरुण कुमार को नहीं पकड़ा है। उनकी तलाश में 12 टीमें, 100 से अधिक पुलिसकर्मी और चार राज्यों में दबिशें जारी हैं। वरुण के पकड़े जाने पर ही हत्या के पीछे की असली वजह और घटना का क्रम स्पष्ट हो सकेगा।




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