राजनाथ सिंह ने SIR पर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया: असहमति अराजकता नहीं
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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने SIR (सुपरइंटेलिजेंस रिव्यू) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर अपना लेख प्रकाशित कर स्पष्ट बयान दिया। उन्होंने बिना ठोस सबूत के संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना अनुचित कहा और असहमति को अराजकता का लाइसेंस नहीं बनाया जा सकता, यह बात दोहराई।
विपक्ष के आरोपों पर राजनाथ सिंह का जवाब
विपक्ष ने SIR के संचालन और ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कई आरोप लगाए थे। राजनाथ सिंह ने इन आरोपों को ‘बिना प्रमाण के’ कहा और कहा कि ऐसे आरोपों से संस्थाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचता है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में असहमति का अधिकार है, परन्तु वह अराजकता को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
ईवीएम से जुड़े सवालों पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
राजनाथ सिंह ने ईवीएम से जुड़े विवादों का उल्लेख करते हुए बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इन सवालों को पहले ही खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय के बाद भी विपक्ष द्वारा बार-बार इन मुद्दों को उठाना न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान के विरुद्ध है।
सरकार का सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के प्रति रवैया
लेख में राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने हमेशा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान किया है और उन पर अमल किया है। उन्होंने इस बात को दोहराते हुए कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और उसके निर्णयों का पालन लोकतंत्र की नींव है।
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मुख्य बातें
- राजनाथ सिंह ने बिना सबूत के संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना गलत कहा।
- असहमति को अराजकता का लाइसेंस नहीं बनाया जा सकता, यह उनका मुख्य संदेश है।
- सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम से जुड़े सवालों को खारिज कर दिया है।
- मोदी सरकार ने हमेशा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सम्मान किया है।
राजनाथ सिंह का यह लेख विपक्ष के लगातार उठाए जा रहे सवालों को ठंडे दिमाग से जवाब देने का प्रयास है, जिसमें उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं की अखंडता और न्यायिक निर्णयों के पालन पर ज़ोर दिया।




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