राजस्थान के पाली में पंचायत चुनाव में पोलिंग पार्टी को बंद करने और मतदान बहिष्कार के मामले
3 मिनट में पढ़ें

राजस्थान के पाली जिले में आयोजित पंचायत चुनाव के दौरान दो अलग‑अलग घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और चुनावी प्रक्रिया को चुनौती दी। एक ओर सरपंच चुनाव के बाद पोलिंग पार्टी को कमरे में बंद करने की सूचना मिली, तो दूसरी ओर मुख्यालय बदलाव व परिसीमन के विरोध में दो गांवों में मतदान बहिष्कार हुआ।
पोलिंग पार्टी को कमरे में बंद करने की घटना
पाली जिले के बगड़ी नगर क्षेत्र के करमावास पट्टा गांव में सरपंच चुनाव के बाद, हार का सामना करने वाले ग्रामीणों ने पोलिंग पार्टी को कमरे में बंद करने का आरोप लगाया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव के परिणाम से नाराज़ ग्रामीणों ने मतदान स्थल पर मौजूद पोलिंग पार्टी को रोक दिया और उसे बंद करने की मांग की। इस कारण से मतदान स्थल पर तनाव उत्पन्न हुआ।
स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन और पुलिस तुरंत कार्रवाई में आए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पोलिंग पार्टी को सुरक्षित रूप से गांव से बाहर निकाल दिया और बाद में एहतियात के तौर पर जाब्ता (पुलिस) तैनात की। घटना के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने आरओ भागीरथ चौधरी को पूरी जानकारी दी, और वर्तमान में प्रशासन गांव में स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।
परिसीमन और मुख्यालय बदलाव के विरोध में मतदान बहिष्कार
पाली जिले के दो अन्य क्षेत्रों में मुख्यालय बदलाव व परिसीमन के विरोध में मतदान बहिष्कार की घटनाएँ सामने आईं।
आपके लिए संबंधित खबरें
डुठारिया गांव में केवल एक वोट
रानी तहसील के डुठारिया गांव में ग्रामीणों ने पंचायत मुख्यालय को इंटदरा मेड़तियान में बदलने के विरोध में मतदान से दूरी बनाई। पहले मुख्यालय भादरलाऊ में था, लेकिन नई जगह पर बदलाव से ग्रामीणों को अतिरिक्त 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही थी। इस कारण से 416 पंजीकृत मतदाताओं में से केवल एक ने ही मतदान किया। प्रशासन ने ग्रामीणों को समझाने के प्रयास किए, परंतु बहिष्कार जारी रहा।
हरिपुर गांव में 308 मतदाताओं का बहिष्कार
सोजत पंचायत समिति के हरिपुर गांव की एक ढाणी में भी परिसीमन के विरोध के कारण मतदान बहिष्कार हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि नई परिसीमन व्यवस्था उनके हितों के विरुद्ध है, जिससे उन्होंने पंच‑सरपंच चुनाव में सामूहिक रूप से मतदान न करने का निर्णय लिया। इस ढाणी में कुल 308 पंजीकृत मतदाता हैं, परंतु किसी ने भी अपना मत नहीं दिया।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
दोनों मामलों में स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को शांत करने के लिए विभिन्न उपाय अपनाए। पोलिंग पार्टी को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद, पुलिस ने जाब्ता तैनात कर सुरक्षा सुनिश्चित की। मतदान बहिष्कार के मामलों में, अधिकारी ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर उन्हें मतदान के महत्व के बारे में समझाने की कोशिश कर रहे हैं, परंतु अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
मुख्य बातें
- पाली जिले के करमावास पट्टा गांव में सरपंच चुनाव के बाद पोलिंग पार्टी को कमरे में बंद करने का आरोप लगा।
- पुलिस ने पोलिंग पार्टी को सुरक्षित बाहर निकाला और जाब्ता तैनात की।
- रानी तहसील के डुठारिया गांव में मुख्यालय बदलाव के विरोध में 416 में से केवल एक मतदाता ने वोट दिया।
- सोजत पंचायत समिति के हरिपुर गांव में 308 पंजीकृत मतदाताओं ने पूरी तरह मतदान से दूरी बनाई।
- प्रशासन ने दोनों मामलों में संवाद और सुरक्षा उपायों के माध्यम से स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की।
इन घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर पंचायत मुख्यालय बदलाव और परिसीमन जैसे प्रशासनिक निर्णयों को बिना पर्याप्त परामर्श के लागू करने से चुनावी प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती है। भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए प्रशासन को ग्रामीणों की राय को शामिल करते हुए निर्णय लेना आवश्यक होगा।




टिप्पणियाँ
0