राहुल गांधी ने मोदी, शाह और ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया
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विपक्षी नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने आपराधिक साजिश के तहत देश को हाईजैक किया है, संविधान को नष्ट किया और वोट चोरी की है।
राहुल गांधी के मुख्य बिंदु
- मोदी, शाह, ज्ञानेश कुमार और उनके सहयोगियों ने पिछले 10‑15 वर्षों में भारत के लोकतंत्र और संविधान को नुकसान पहुँचाया है।
- कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा आदि राज्यों में सबूत दिखाए जाने के बाद जनता में इस बात की स्वीकृति बढ़ रही है।
- दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार को लिखित में बताया कि इलेक्टोरल सिस्टम कोलैप्स कर गया है।
- राहुल गांधी ने कहा कि यह पहला राजनीतिक कदम होगा जिसके बाद सरकार बदलने पर व्यापक जांच होगी।
- जांच में यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन लोगों ने लोकतंत्र को समाप्त किया और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी।
- विरोधी सांसदों के लगभग 300 सदस्यों ने गांधी स्मारक में शांतिपूर्ण धरना देने की योजना बनाई, परन्तु उन्हें विभिन्न कारणों से रोक दिया गया।
विरोधी का दावा: वोट देने का अधिकार छीनना
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी कहा कि बीजेपी सरकार लोगों से वोट देने का अधिकार छीन रही है। उन्होंने कहा कि मोदी और शाह उन मूलभूत स्वतंत्रताओं को छीन रहे हैं, जिन्हें महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान नेताओं ने स्थापित किया था।
राहुल गांधी का भविष्यवाणी
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार बदलने के बाद एक व्यापक जांच होगी, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि किन-किन व्यक्तियों ने लोकतंत्र को समाप्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया चल रही है और इसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि इन सभी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा और उन्हें सजा मिलेगी।
विरोधी प्रदर्शन की स्थिति
राहुल गांधी ने बताया कि विरोधी नेताओं के मार्च से पहले लगभग 300 सांसद शांतिपूर्ण धरना देना चाहते थे, परन्तु उन्हें प्रदर्शन के पहले दिन चुनाव आयोग के कार्यालय के पास रोक दिया गया और दूसरे दिन जंतर‑मंतर जाने से भी रोका गया। उन्होंने इन घटनाओं को सरकार द्वारा विरोध को दबाने के प्रयास के रूप में बताया।
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इन सभी बयानों के बावजूद, अभी तक कोई आधिकारिक जांच या न्यायिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। सभी आरोपों की पुष्टि या खंडन के लिए आगे की जांच आवश्यक होगी।




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