पुणे के गूंज कार्यक्रम में छात्रों ने राहुल गांधी के सामने रखीं पेपर लीक और भर्ती में देरी की गंभीर मांगें
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पुणे में आयोजित गूंज कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों से खुली बातचीत की, जहाँ छात्रों ने सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में पेपर लीक और विभिन्न विभागों में रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को प्रमुख समस्या के रूप में उठाया। यह संवाद छात्रों की आपबीती और भविष्य की चिंताओं को उजागर करता है।
कार्यक्रम का सारांश
गूंज कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए और उनके सामने रखे मुद्दों को सुनने का वचन दिया। छात्रों ने बताया कि पेपर लीक की घटनाओं से उनके अध्ययन में निराशा और भविष्य के रोजगार के अवसरों पर अनिश्चितता पैदा हो रही है। साथ ही, कई सरकारी विभागों में भर्ती प्रक्रिया के रुकने से कई अभ्यर्थियों का करियर ठहर गया है।
छात्रों द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दे
- सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
- विभिन्न विभागों में भर्ती प्रक्रिया का स्थगित रहना, जिससे कई अभ्यर्थियों की नौकरी पाने की आशा टलमटली है।
- पेपर लीक और भर्ती में देरी के कारण छात्रों के शैक्षणिक और करियर योजना पर नकारात्मक प्रभाव।
छात्रों की आपबीती
कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने कई बार परीक्षा दी, लेकिन पेपर लीक की खबरें सुनकर उनका मनोबल गिर गया। एक छात्र ने कहा, “जब परीक्षा में प्रश्नपत्र लीक हो जाता है, तो मेहनत का फल नहीं मिलता और हमें दोबारा तैयारी करनी पड़ती है।” इसी तरह, एक अन्य छात्र ने बताया कि वह एक सरकारी विभाग में भर्ती के लिए तैयार था, लेकिन प्रक्रिया के रुकने के कारण अब वह अनिश्चितता में फँस गया है।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया
राहुल गांधी ने छात्रों की बातों को गंभीरता से सुना और कहा कि वे इस मुद्दे को पार्टी के उच्च स्तर तक पहुँचाएंगे। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पेपर लीक जैसी अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे और भर्ती प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए उचित उपाय किए जाएंगे।
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मुख्य बातें
- पुणे के गूंज कार्यक्रम में छात्रों ने पेपर लीक और भर्ती में देरी को प्रमुख मुद्दा बनाया।
- राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए प्रतिबद्धता जताई।
- छात्रों का कहना है कि ये समस्याएँ उनके भविष्य और करियर पर नकारात्मक असर डाल रही हैं।
यह संवाद छात्रों को आशा देता है कि उनके सामने रखे मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जाएंगे और उचित समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे।




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