पीलीभीत में वोटर लिस्ट विवाद: कांग्रेस के आरोपों पर ईसीआई ने प्रदेश भर में जांच का आदेश
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कांग्रेस ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए ईसीआई को कार्रवाई करने का आग्रह किया। इस पर उत्तर प्रदेश मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने पूरे राज्य में वोटर लिस्ट की गहन जांच का आदेश दिया।
कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस ने बताया कि 10 अप्रैल 2026 को जारी SIR की फाइनल वोटर लिस्ट के बाद जुलाई‑सितंबर के बीच 13,150 वोटरों के EPIC नंबर और सीरियल नंबर समान रहते हुए भी उनके नाम बदल दिए गए। इसके अलावा 884 वोटरों के नाम हटाए गए और 2,600 नाम नए जोड़े गए, जिससे कुल 16,554 विसंगतियों का पता चला। पार्टी ने कहा कि यदि EPIC नंबर वही रहे पर नाम बदल जाए तो मतदान के दिन वास्तविक मतदाता को कठिनाई हो सकती है।
मुख्य आरोप
- 13,150 वोटरों के EPIC नंबर समान रहते हुए नाम बदलना
- 884 वोटरों के नाम हटाना जबकि वे अभी भी क्षेत्र में रहते हैं
- 2,600 नामों का जोड़, जिनके पास वास्तविक निवास नहीं है
ईसीआई की प्रतिक्रिया
मुख्य चुनाव अधिकारी नवदीप रिणवा ने पीलीभीत के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और VRC ऑपरेटर को तुरंत हटाने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई का आदेश दिया।
रिणवा ने सभी जिला चुनाव अधिकारियों को अपने‑अपने जिलों की सभी विधानसभा क्षेत्रों की वोटर लिस्ट की गहन जांच कर दो दिन में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया। इस प्रकार मामला अब पीलीभीत तक सीमित नहीं रहकर पूरे उत्तर प्रदेश में विस्तृत जांच का विषय बन गया है।
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समाजवादी पार्टी का भी जुड़ाव
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव भी वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सपा ने कम से कम 100 विधानसभा सीटों पर समान प्रकार की शिकायतें दर्ज करवाई हैं, जिनमें एक ही व्यक्ति के नाम पर कई EPIC नंबर और नामों की पुनरावृत्ति शामिल है। आजमगढ़ में 19‑वर्षीय विकास यादव का नाम 10 बार दर्ज होने का मामला भी सपा द्वारा उजागर किया गया।
वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया पर सवाल
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने के लिए फॉर्म‑7 का उपयोग किया जाता है। कांग्रेस और सपा दोनों ने सवाल उठाया है कि क्या इस प्रक्रिया का दुरुपयोग करके वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। जांच के परिणामों के आधार पर यह तय होगा कि इन प्रविष्टियों को तकनीकी त्रुटि माना जाए या नियामक उल्लंघन।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्व
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज हो रही है। सभी प्रमुख दल—भाजपा, सपा और कांग्रेस—अपने‑अपने चुनावी समीकरण तैयार कर रहे हैं। इस संदर्भ में वोटर लिस्ट की शुद्धता चुनावी निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन गई है।
वोटर लिस्ट विवाद के तीन प्रमुख पहलू
- वास्तविक मतदाता के नाम का सुरक्षित रहना और उनका मतदान अधिकार सुनिश्चित करना।
- दोहरी और गलत प्रविष्टियों की पहचान व सुधार, जिससे एक ही व्यक्ति के कई EPIC नंबर न हों।
- जांच का निष्पक्ष, पारदर्शी और सार्वजनिक होना, ताकि जिम्मेदारियों का निर्धारण हो सके।
जैसे ही ईसीआई की विस्तृत रिपोर्ट सामने आएगी, यह स्पष्ट होगा कि पीलीभीत में उजागर किए गए विसंगतियों का पैमाना क्या है और क्या यह पूरे राज्य में समान समस्याओं का संकेत है। इस प्रक्रिया के परिणामों से आगामी चुनावों की तैयारी और रणनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।




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