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पराली जलाने पर CAQM की कड़ी चेतावनी: पंजाब‑हरियाणा को सर्दियों में हवा साफ रखने के लिए त्वरित कार्रवाई का निर्देश

4 मिनट में पढ़ें

By Kishan kumar Jain• प्रकाशित 23 Oct 2026• अपडेट 23 Oct 2026
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पराली जलाने पर CAQM की कड़ी चेतावनी: पंजाब‑हरियाणा को सर्दियों में हवा साफ रखने के लिए त्वरित कार्रवाई का निर्देश
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब और हरियाणा को पराली जलाने को रोकने, मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर कड़ी निगरानी के लिए सख्त निर्देश दिए।…

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 22 अक्टूबर को चंडीगढ़ में आयोजित समीक्षा बैठक में पंजाब और हरियाणा सरकारों को सर्दियों के प्रमुख प्रदूषण काल में दिल्ली‑NCR की हवा को साफ रखने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। पराली जलाने को रोकने, फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने और अन्य प्रदूषण स्रोतों पर कड़ी निगरानी के लिए कई ठोस उपायों की रूपरेखा पेश की गई।

पराली प्रबंधन में मशीनों का महत्व

बैठक में पंजाब सरकार की कार्ययोजना, जिलों की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई। आयोग ने CRM मशीनों की उपलब्धता, किसानों तक उनकी पहुँच और कटाई के दौरान उनके प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया। पराली के संग्रह, परिवहन और उपयोग की व्यवस्था को भी सुदृढ़ करने की बात कही गई।

मुख्य निर्देश

  • पराली प्रबंधन के लिए उपलब्ध CRM मशीनों की संख्या बढ़ाएँ और किसानों को मुफ्त या सब्सिडी पर उपलब्ध कराएँ।
  • पराली के संग्रह‑परिवहन के लिए लॉजिस्टिक नेटवर्क स्थापित करें, जिससे खेतों से पराली को तुरंत हटाया जा सके।
  • सैटेलाइट अलर्ट, ड्रोन और कम लागत वाले सेंसर के माध्यम से जलते हुए क्षेत्रों की त्वरित पहचान और फील्ड जांच को लागू करें।

पराली को उद्योगिक संसाधन बनाना

CAQM ने ईंट‑भट्ठों में धान की पराली से बने बायोमास पेलेट और ब्रिकेट के उपयोग के निर्देशों की समीक्षा की। थर्मल पावर प्लांट में कोयले के साथ बायोमास के मिश्रण के लक्ष्य की प्रगति पर भी चर्चा हुई। आयोग का मानना है कि पराली को केवल जलाने की समस्या नहीं, बल्कि इसे उद्योगों के लिए उपयोगी संसाधन बनाकर प्रदूषण घटाया जा सकता है और किसानों की आय में सुधार किया जा सकता है।

हरियाणा में वाहनों और धूल से होने वाला प्रदूषण

हरियाणा सरकार के साथ बैठक में पराली के अलावा कई प्रमुख प्रदूषण स्रोतों की समीक्षा की गई। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

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  • पेट्रोल पंप और CNG स्टेशन पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम की स्थापना की प्रगति।
  • पुराने और आयु‑सीमा पूरी कर चुके वाहनों (End‑of‑Life Vehicles) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
  • एनसीआर के जिलों में डीजल‑ऑटो रिक्शा को चरणबद्ध हटाने की दिशा में कदम।
  • सड़कों की धूल को नियंत्रित करने के लिए नियमित सफाई, मैकेनिकल रोड स्वीपिंग और निर्माण‑तोड़फोड़ स्थल पर धूल रोकने के नियमों का कड़ाई से पालन।
  • औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण मानकों की निगरानी और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई।

जमीनी स्तर पर निगरानी और समन्वय

आयोग ने दोनों राज्यों को निर्देश दिया कि प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं को तय समयसीमा में लागू किया जाए। इसके लिए राज्य सरकार, जिला प्रशासन और प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। प्रमुख उपायों में शामिल हैं:

  1. किसानों को CRM मशीनें उपलब्ध कराना और खेतों में ही पराली के निपटारे को सुनिश्चित करना।
  2. पराली को खेतों से बाहर ले जाकर बायोमास उद्योग में उपयोग करने की व्यवस्था को सुदृढ़ करना।
  3. जागरूकता अभियान (IEC) को जमीन स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करना।

लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

CAQM ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासनिक लापरवाही के कारण पराली जलाने की घटनाएँ बढ़ती हैं, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। आयोग ने कहा कि सर्दियों के महत्वपूर्ण प्रदूषण काल में दिल्ली‑NCR की हवा को साफ रखने के लिए पंजाब, हरियाणा और सभी संबंधित एजेंसियों को मिलकर निरंतर और प्रभावी कार्रवाई करनी होगी।

मुख्य बातें

  • पराली जलाने को रोकने के लिए CRM मशीनों की उपलब्धता और उपयोग को बढ़ावा देना।
  • सैटेलाइट, ड्रोन और सेंसर द्वारा जलते हुए क्षेत्रों की त्वरित पहचान।
  • ईंट‑भट्ठों और थर्मल पावर प्लांट में बायोमास के उपयोग को बढ़ाना।
  • ANPR सिस्टम, पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई और डीजल‑ऑटो रिक्शा हटाना।
  • सड़कों की धूल नियंत्रण के लिए नियमित सफाई और निर्माण स्थल पर नियमों का पालन।
  • जमीनी स्तर पर समन्वय, जागरूकता अभियान और समयसीमा में कार्यान्वयन।
  • लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी।
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