निति आयोग की नई ‘क्रिटिकल टेक्नोलॉजी’ लिस्ट से 6G, EV और रक्षा में आत्मनिर्भरता का बड़ा कदम
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विदेशी सप्लाई में अचानक रुकावट या प्रतिबंध से बचने के लिए भारत सरकार ने एक नई रणनीति तैयार की है। नीति आयोग (Niti Aayog) अब ‘क्रिटिकल टेक्नोलॉजी’ की एक विशेष लिस्ट तैयार कर रहा है, जिसमें 6G आर्किटेक्चर, 6G हार्डवेयर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पावरट्रेन, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और रक्षा उपकरण जैसी प्रमुख तकनीकों को शामिल किया गया है। इस लिस्ट के आधार पर सरकार स्वदेशी उत्पादन को तेज़ करने, निजी क्षेत्र के निवेश को आकर्षित करने और रिसर्च‑डिवेलपमेंट (R&D) को सुदृढ़ करने के लिए विस्तृत रोडमैप तैयार कर रही है।
क्रिटिकल टेक्नोलॉजी लिस्ट की प्रमुख प्रविष्टियां
- 6G आर्किटेक्चर और हार्डवेयर – अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार तकनीक, जो 2030 के आसपास व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हो सकती है।
- इलेक्ट्रिक वाहन पावरट्रेन (EV Powertrains) – बैटरी‑प्रबंधन, मोटर‑ड्राइव और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के स्वदेशी समाधान।
- जीनोमिक सीक्वेंसिंग (Genomic Sequencing) – स्वास्थ्य, कृषि और बायो‑टेक्नोलॉजी में उपयोगी जीन‑डेटा का स्वदेशी उत्पादन।
- रक्षा उपकरण – एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत हथियार प्रणाली में आत्मनिर्भरता।
सरकारी समर्थन का ढांचा
लिस्ट को अंतिम रूप देने के बाद, नीति आयोग ने कई प्रमुख उपायों की रूपरेखा तैयार की है:
- प्रारम्भिक चरण में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम (PSUs) द्वारा तय मात्रा में उत्पादों की खरीदारी की गारंटी, जिससे बाजार में शुरुआती मांग सुनिश्चित हो सके।
- रिसर्च फंड का विशेष आवंटन – राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और 1 लाख करोड़ रुपये के ‘रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड’ (RDIF) के तहत 7,131 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता के साथ 14 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) को मंजूरी।
- पाँच फोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइजेशन को समर्थन, जिससे इन तकनीकों के विकास में तेज़ी आए।
अंतरराष्ट्रीय तुलना
अमेरिका, यूरोपीय संघ, चीन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे देशों ने पहले ही अपनी ‘क्रिटिकल टेक्नोलॉजी’ लिस्ट बनाकर फंडिंग और नीति समर्थन स्थापित किया है। भारत अब इन देशों के समान एक सटीक, लक्ष्य‑उन्मुख रणनीति अपनाकर वैश्विक सप्लाई चेन में संभावित झटकों से खुद को बचाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
मुख्य बातें
- निति आयोग 6G, EV पावरट्रेन, जीनोमिक सीक्वेंसिंग और रक्षा उपकरण को ‘क्रिटिकल टेक्नोलॉजी’ के रूप में पहचान रहा है।
- लिस्ट अगले महीने तक सार्वजनिक हो सकती है, जिससे निजी निवेशकों को स्पष्ट दिशा‑निर्देश मिलेंगे।
- सरकारी कंपनियों द्वारा शुरुआती चरण में खरीदारी गारंटी, बाजार में मांग को स्थिर रखने में मदद करेगी।
- RDIF के तहत 7,131 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता और 14 AIF को मंजूरी, नई तकनीकों के इकोसिस्टम को सुदृढ़ करेगी।
- ANRF और अन्य रिसर्च संस्थानों को फोकस्ड समर्थन, स्वदेशी R&D को तेज़ी देगा।
आगे का रास्ता
क्रिटिकल टेक्नोलॉजी लिस्ट के जारी होने के बाद, नीति आयोग और संबंधित मंत्रालयों को विस्तृत कार्य योजना तैयार करनी होगी। इसमें तकनीकी मानकों की परिभाषा, स्टार्ट‑अप एवं MSME के लिए प्रोत्साहन पैकेज, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश शामिल होंगे। यदि इन कदमों को समय पर लागू किया गया, तो भारत 2030 तक 6G, इलेक्ट्रिक वाहन और बायोटेक्नोलॉजी में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्थिति हासिल कर सकता है।
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सारांश में, निति आयोग की यह पहल भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर एक ठोस कदम है, जो न केवल आर्थिक सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि नवाचार और रोजगार सृजन में भी नई संभावनाएं खोलेंगी।




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