नीला ड्रम कांड: कोर्ट ने मुस्कान‑साहिल को फांसी की सजा, 5 प्रमुख तर्कों के साथ
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मेरठ में 16 महीने पहले हुई ‘नीला ड्रम’ हत्या के बाद आज कोर्ट ने अंतिम फैसला सुनाया। पति सौरभ राजपूत की हत्या में संलिप्त पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा दी गई और साथ ही 20‑20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इस फैसले में न्यायालय ने पाँच प्रमुख तर्कों को आधार बनाया, जिससे यह मामला ‘रेयर टू रेयरेस्ट’ माना गया।
मुख्य तर्क जिनके आधार पर फांसी की सजा दी गई
- विधिवत योजना: कोर्ट ने कहा कि इस हत्या की पूरी योजना पहले से बनायी गयी थी। बाजार से विशेष नीला ड्रम, विशेष चाकू और सीमेंट का घोल लाया गया था।
- हथियारों की विशेषता: विशेष चाकू को इस तरह तैयार किया गया था कि वह हड्डियों तक आसानी से कट सके। इस चाकू से सौरभ के शरीर को तीन टुकड़ों में काटा गया।
- नशे में हत्या: सौरभ को खाने में नशीली चीज़ खिलाकर नशे की अवस्था में मार दिया गया, जिससे हत्या के समय उसकी प्रतिरोध क्षमता कम थी।
- शरीर के टुकड़े ड्रम में डालना: हत्या के बाद चाकू से कटे हुए टुकड़ों को नीले ड्रम में रखा गया और सीमेंट के घोल से भर दिया गया, जिससे टुकड़े रातभर में जम गए। साहिल ने सौरभ के सिर और पंजे को तकिए की कवर में लेकर घर तक ले गया, फिर उन्हें भी ड्रम में डाल दिया।
- समाज पर प्रभाव और ‘नजीर’ का रूप: कोर्ट ने कहा कि इस घटना के बाद कई समान मामलों में पत्नियों ने अपने पतियों की हत्या की, और यह केस ‘नजीर’ बन गया। नीला ड्रम अब खौफ का प्रतीक बन चुका है, इसलिए इस प्रकार के मामलों में कोई रहम नहीं दी जा सकती।
न्यायालय का सामाजिक एवं सांस्कृतिक संदर्भ
फैसले में न्यायालय ने महाभारत के एक प्रसंग का हवाला देते हुए कहा कि बुरे कर्म का नतीजा बुरा ही होता है। इस प्रकार के घृणित अपराधों को सामाजिक संदेश के रूप में नहीं देखा जा सकता, इसलिए कड़ी सजा अनिवार्य थी। साथ ही, मुस्कान की माँग पर उसकी दो बेटियों के संरक्षण की व्यवस्था भी की गई।
केस की विशेषता: ‘रेयर टू रेयरेस्ट’
कोर्ट ने इस मामले को ‘रेयर टू रेयरेस्ट’ कहा, क्योंकि यह न केवल हत्या की विधिवत योजना और विशेष हथियारों से किया गया, बल्कि उसके बाद के कृत्य (शरीर के टुकड़े ड्रम में डालना) भी अत्यंत बर्बरता के स्तर पर थे। इस कारण यह केस सामान्य हत्या मामलों से अलग माना गया।
मुख्य बातें
- कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाई।
- दोनों पर 20,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
- हत्या की योजना में विशेष नीला ड्रम, चाकू और सीमेंट का उपयोग किया गया।
- सौरभ को नशे में मारकर उसके शरीर को टुकड़ों में काटा गया।
- शरीर के टुकड़े ड्रम में डालकर सीमेंट से भर दिया गया, जिससे टुकड़े रातभर में जम गए।
- केस को ‘रेयर टू रेयरेस्ट’ कहा गया, सामाजिक प्रभाव को देखते हुए।
- मुस्कान की माँग पर उसकी दो बेटियों के संरक्षण की व्यवस्था की गई।
यह फैसला मेरठ के ‘नीला ड्रम’ कांड को समाप्त करता है, लेकिन इस घटना ने समाज में महिलाओं द्वारा पति की हत्या के मामलों में एक नया चेतावनी संकेत स्थापित किया है। न्यायालय ने इस प्रकार के बर्बर कृत्यों को रोकने के लिए कड़ी सजा को आवश्यक बताया है।




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