नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स को 50,000 सुझाव, रिपोर्ट अक्टूबर के अंत में
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राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से गठित नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय टास्क फोर्स ने दो महीने में 58 बैठकों के माध्यम से 50,000 से अधिक सुझाव एकत्र किए हैं। समिति ने बताया कि वह अक्टूबर के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी में है।
टास्क फोर्स की कार्यवाही का सारांश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई को छह सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया था। इस समूह ने विभिन्न मंत्रालयों, परीक्षा एजेंसियों, तकनीकी विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ मिलकर 18 मुख्य बैठकें और 40 से अधिक परामर्श सत्र आयोजित किए। इन बैठकों में स्टूडेंट्स, अभिभावकों, संगठनों और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से 50,000 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए।
मुख्य सुझाव
- नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन और उसे राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण का दर्जा देना।
- NTA के 75% तकनीकी एवं सुरक्षा पदों को तीन साल के भीतर स्थायी कर्मचारियों से भरना।
- आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या को कुल कार्यबल के 25% तक सीमित करना।
- परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया और परीक्षा संचालन को अलग‑अलग एजेंसियों को सौंपना।
- प्रमाणित परीक्षा केंद्रों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाना और सालाना निरीक्षण व 15 दिन पहले भौतिक ऑडिट करना।
- NEET को कंप्यूटर‑आधारित परीक्षा (CBT) मोड में बदलने की तैयारी, जिसमें आईटी बुनियादी ढांचा और साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करना शामिल है।
- AI‑आधारित पेपर लीक पहचान, डिजिटल प्रश्नपत्र लॉकिंग और बड़े प्रश्न बैंक की व्यवस्था।
NTA के पुनर्गठन पर प्रस्ताव
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने NTA में बड़े बदलाव करने के सुझाव प्रस्तुत किए। इन सुझावों में एजेंसी के 75% तकनीकी एवं सुरक्षा पदों को स्थायी कर्मचारियों से भरना और आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या को 25% तक सीमित करना शामिल है। टास्क फोर्स ने संसद में कानून पारित कराकर NTA को कानूनी अधिकारों से लैस एक राष्ट्रीय परीक्षा प्राधिकरण का दर्जा देने का भी प्रस्ताव रखा है। इस ढाँचे के तहत साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक्स, साइकोमेट्रिक्स और सतर्कता के लिए अलग‑अलग विभाग स्थापित करने की सिफ़ारिश की गई है।
परीक्षा प्रक्रिया में संभावित बदलाव
टास्क फोर्स ने परीक्षा के विभिन्न कार्यों को अलग‑अलग एजेंसियों को सौंपने की संभावना पर विचार किया है। प्रश्नपत्र तैयार करना, सुरक्षा व्यवस्था और परीक्षा केंद्रों का संचालन अलग‑अलग जिम्मेदारियों में बाँटने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। इसके अलावा, प्रमाणित परीक्षा केंद्रों का राष्ट्रीय रजिस्टर बनाकर, सालाना निरीक्षण और परीक्षा से 15 दिन पहले भौतिक ऑडिट कराकर, विफल केंद्रों पर कार्रवाई करने की सिफ़ारिश की गई है।
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NEET को CBT मोड में बदलने की तैयारी
सरकार अगले वर्ष से NEET को पेन‑पेपर के बजाय कंप्यूटर‑आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने की योजना पर काम कर रही है। इस परिवर्तन के लिए परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, आधुनिक आईटी सुविधाएँ और मजबूत बुनियादी ढाँचा आवश्यक होगा। AI की मदद से पेपर लीक का पता लगाने, प्रश्नपत्र को डिजिटल रूप से लॉक करने और बड़े प्रश्न बैंक को तैयार रखने के सुझाव भी प्राप्त हुए हैं। टास्क फोर्स ने लिसन‑एट‑स्केल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से आम जनता द्वारा दिए गए सुझावों की समीक्षा की है और इन पर आधारित अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है।
रिपोर्ट की समयसीमा
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, टास्क फोर्स अपनी अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक सरकार को सौंप सकती है। इस रिपोर्ट में ऊपर उल्लिखित सभी सुझावों और प्रस्तावों का विस्तृत विश्लेषण होगा, जिससे राष्ट्रीय परीक्षाओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और दक्षता में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
मुख्य बातें
- टास्क फोर्स ने 58 बैठकों में 50,000 से अधिक सुझाव एकत्र किए।
- रिपोर्ट अक्टूबर के अंत तक सौंपने की योजना।
- NTA का पुनर्गठन, स्थायी कर्मचारियों का बढ़ावा और आउटसोर्सिंग सीमित करना।
- परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा, प्रश्नपत्र प्रक्रिया और संचालन को अलग‑अलग एजेंसियों को सौंपना।
- NEET को CBT मोड में बदलने की तैयारी, AI‑आधारित लीक रोकथाम सहित।




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