नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार: पुणे के डोंजे गांव में राजकीय सम्मान के साथ विदाई
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सिनेमा के पाँच दशकों से अधिक समय तक राज करने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने 8 अक्टूबर को इस दुनिया से विदा ली। उनकी इच्छा के अनुसार पुणे के डोंजे गांव में उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहाँ उनका फार्म हाउस स्थित है। महाराष्ट्र सरकार ने राजकीय सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी, जिससे उनके चाहने वालों और फिल्म जगत के कई हस्तियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
अंतिम संस्कार का विवरण
रात करीब 11 बजे नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार डोंजे गांव में आयोजित हुआ। उनके फार्म हाउस की जमीन पर ही इस समारोह को संपन्न किया गया। दूर‑दराज के इलाकों से कई लोग, जिसमें फिल्म उद्योग के सहयोगी, मित्र और प्रशंसक शामिल थे, अंतिम दर्शन करने पहुंचे।
राजकीय सम्मान के साथ विदाई
महाराष्ट्र सरकार ने नाना पाटेकर को उनके सिनेमा में अतुलनीय योगदान के लिए राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी। यह सम्मान उनके 5 दशकों के करियर और दर्शकों के दिलों में बसे अनगिनत किरदारों की सराहना का प्रतीक था।
नाना पाटेकर का जीवन और करियर
1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड‑जंजीरा में जन्मे नाना पाटेकर हिंदी और मराठी दोनों सिनेमा के एक प्रमुख कलाकार थे। उन्होंने 1978 में अपनी पहली हिंदी फिल्म ‘गमन’ से बॉलीवुड में कदम रखा और अगले वर्ष मराठी फिल्म ‘सिंहासन’ से मराठी सिनेमा में प्रवेश किया। उनके करियर की कुछ उल्लेखनीय फिल्में हैं: ‘वेलकम’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अपहरण’, ‘अब तक छप्पन’, ‘तिरंगा’, ‘राजनीति’ और ‘टैक्सी नंबर‑9211’।
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कृषि में नाना पाटेकर की जुड़ाव
फिल्मी काम से फ्री होने पर नाना पाटेकर अपने फार्म हाउस में स्थानीय किसानों के साथ मिलकर गेहूं, चना जैसी फसलों की खेती करते थे। वे अपनी कमाई का एक हिस्सा किसानों के साथ बाँट देते थे, जिससे उनकी दयालुता और जमीन से जुड़ी सादगी स्पष्ट होती है।
मुख्य बातें
- नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार 8 अक्टूबर को पुणे के डोंजे गांव में हुआ।
- समारोह रात 11 बजे आयोजित किया गया और राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई।
- उनकी इच्छा थी कि अंतिम संस्कार उनके फार्म हाउस की जमीन पर ही हो।
- नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को मुरुड‑जंजीरा, महाराष्ट्र में हुआ।
- बॉलीवुड में उनका पहला फिल्म ‘गमन’ (1978) और मराठी सिनेमा में ‘सिंहासन’ (1979) था।
- वे खेती में भी सक्रिय थे और किसानों के साथ कमाई बाँटते थे।
नाना पाटेकर का निधन भारतीय सिनेमा के लिए एक बड़ा नुकसान है, पर उनकी यादें और उनके द्वारा निभाए गए किरदार हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे।




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