मुंबई मेट्रो के नए टचलेस थूकदान को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल
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मुंबई मेट्रो के एक स्टेशन पर लगाए गए टचलेस थूकदान (Spit Bin) की तस्वीर हाल ही में सोशल मीडिया पर धूम मचा रही है। इस तस्वीर को एक एक्टिविस्ट ने X (पहले ट्विटर) पर शेयर किया, जिसके बाद नेटिजन्स में बहस छिड़ गई। कई लोगों ने इसे सिविक सेंस का ‘जनाजा’ कहकर आलोचना की, जबकि मेट्रो में थूकना प्रतिबंधित है और 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाता है।
टचलेस थूकदान की विशेषताएँ
वायरल तस्वीर में दिखाया गया थूकदान ‘ईजीस्पिट’ (Ezyspit) कंपनी द्वारा निर्मित है। यह बिना हाथ लगाए खुलता है और निर्माता का दावा है कि यह 10 सेकंड में वायरस को नष्ट कर देता है। डिब्बे पर मुंबई मेट्रो का लोगो और ‘जिम्मेदार बनें’ का स्लोगन लिखा है।
सामाजिक प्रतिक्रिया
तस्वीर के सामने आते ही मुंबई के कई नागरिकों ने अपनी नाराज़गी जाहिर की। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- एक तरफ मेट्रो में थूकने पर 500 रुपये का जुर्माना, तो दूसरी तरफ थूकदान लगाकर थूकने को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
- कई उपयोगकर्ता ने कहा कि ऐसी चीजें सफाई नहीं, गंदगी को बढ़ावा देती हैं।
- ‘सिविक सेंस का जनाजा’ जैसी टिप्पणी ने इस मुद्दे को और तीखा बना दिया।
- स्टेशनों पर हैंड ड्रायर जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं हैं, फिर थूकदान क्यों लगाया गया?
प्रशासनिक दृष्टिकोण
मुंबई मेट्रो ने अभी तक इस विवाद पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर कई शहरों में समान उपाय अपनाए जा रहे हैं। टचलेस थूकदान का उद्देश्य वायरस के प्रसार को रोकना बताया जाता है, परन्तु जनता के बीच इसके प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं।
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मुख्य बातें
- टचलेस थूकदान ‘ईजीस्पिट’ कंपनी द्वारा निर्मित, बिना हाथ लगाए खुलता है।
- मुंबई मेट्रो में थूकना प्रतिबंधित, 500 रुपये का जुर्माना।
- सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल, नागरिकों ने सिविक सेंस की कमी पर सवाल उठाए।
- प्रशासन से स्पष्ट दिशा-निर्देश और वैकल्पिक स्वच्छता उपायों की मांग।
आगे क्या हो सकता है?
यदि सार्वजनिक प्रतिक्रिया जारी रहती है, तो मुंबई मेट्रो या तो थूकदान को हटाने या उसकी जगह अधिक उपयोगी स्वच्छता सुविधाएँ (जैसे हैंड ड्रायर, एंटीबैक्टीरियल सतह) स्थापित करने पर विचार कर सकता है। साथ ही, सिविक सेंस और स्वच्छता के बारे में जागरूकता अभियानों की आवश्यकता भी उभर कर सामने आ सकती है।




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